Wednesday, 25 March 2026
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कटनी के पूर्व कप्तान अभिजीत रंजन पर पद के दुरुपयोग के आरोप | पत्नी की आवाजाही में सरकारी गाड़ी और जवान तैनात?

अभिजीत रंजन जी यानि कटनी के तत्कालीन कप्तान साहब ने पद का दुरुपयोग कैसे किया..दरअसल अभिजीत रंजन की पत्नी नुपुर धमीजा रंजन जबलपुर में वकालत करती थीं, जो उस समय सरकारी वकील भी रही हैं. बताया जाता है कि उस दौरान मैडम कटनी में रहती थीं लेकिन वकालत जबलपुर हाई कोर्ट में करती थीं, जिसके कारण उनका रोजाना आना-जाना होता था. ऐसे में उनके लिए सरकारी पैसे से रक्षित केंद्र कटनी द्वारा एक स्कॉर्पियो (रजिस्ट्रेशन नंबर MP 20 ZE 9339) किराये पर ली गई. कागजों में इस गाड़ी का उपयोग सरकारी कार्यों के लिए बताया गया, जबकि आरोप है कि इसका इस्तेमाल मैडम के आवागमन में होता रहा. यह स्कॉर्पियो कटनी निवासी श्रवण कुमार यादव की बताई जाती है और इसे विभाग में अटैच करने के दौरान नियमों का पालन हुआ या नहीं, यह भी जांच के दायरे में है. आरोप यह भी है कि इस वाहन में डलने वाले ईंधन का भुगतान करीब दो वर्षों तक पुलिस मद से किया गया. इतना ही नहीं, कप्तान की पत्नी होने के कारण प्रतिदिन चार जवानों की ड्यूटी भी उनके साथ लगा दी गई. स्वराज एक्सप्रेस के पास जिन जवानों की ड्यूटी लगने की बात कही जा रही है, उनमें कौशलेन्द्र सिंह, सुरेन्द्र वर्मान, भगवत सिंह और संजय गुनहारे के नाम सामने आए हैं. कहा जा रहा है कि जब भी मैडम कटनी से जबलपुर हाई कोर्ट जाती थीं, इनमें से तीन जवान उनके साथ जाते थे, जिसकी पुष्टि मोबाइल लोकेशन और सीडीआर से किए जाने की बात कही जा रही है, वहीं कटनी से जबलपुर के बीच पड़ने वाले टोल नाकों के सीसीटीवी फुटेज से भी स्थिति स्पष्ट हो सकती है. आरोप यह भी है कि चूंकि स्कॉर्पियो पुलिस महकमे में अटैच थी, इसलिए टोल टैक्स का भुगतान भी नहीं किया जाता था. यदि यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी संसाधनों के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े करता है. बताया जा रहा है कि यह सिलसिला एक-दो दिन नहीं बल्कि पूरे दो वर्षों तक चला, यानी जब तक अभिजीत रंजन कटनी के कप्तान रहे. इधर जबलपुर हाई कोर्ट के वकील राजकुमार सोनी ने शपथपत्र देकर पूरे मामले की शासन से जांच कराने की मांग की है, जिस पर छिंदवाड़ा डीआईजी मनीष खत्री द्वारा जांच किए जाने की बात सामने आई है. हालांकि जांच कहां तक पहुंची है, इस पर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आ सकी है. कुल मिलाकर मामला सरकारी संसाधनों के कथित उपयोग और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों से जुड़ा है, जिसकी सच्चाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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