जबलपुर: बरगी बांध में हुए भीषण क्रूज हादसे ने अब एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। 13 मासूम जिंदगियों को लील लेने वाले इस हादसे में मुख्य 'साक्ष्य' यानी उस क्रूज को ही नष्ट किए जाने पर प्रशासन और पर्यटन विकास निगम घेरे में है। विपक्ष और स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि तकनीकी खामियों को छिपाने के लिए आनन-फानन में क्रूज को ठिकाने लगाया गया है।
साक्ष्य मिटाने के आरोप: क्या छिपा रहा है प्रशासन?
हादसे की जांच के लिए राज्य स्तरीय टीम गठित की गई है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही दुर्घटनाग्रस्त क्रूज को नष्ट कर दिया गया।
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विपक्ष का हमला: कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष संजय यादव ने इसे 'सबूत मिटाने' की साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि क्रूज ही सबसे बड़ा तकनीकी साक्ष्य था, जिससे पता चलता कि इंजन या बॉडी में क्या खराबी थी।
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आम आदमी पार्टी का स्टैंड: 'आप' के जिला अध्यक्ष रीतेश सिंह ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी क्या जल्दी थी कि जांच रिपोर्ट आने से पहले ही साक्ष्य को हटा दिया गया? यह सीधे तौर पर महत्वपूर्ण तथ्यों को दबाने का संकेत है।
38 लाख का मेंटेनेंस और 'जुगाड़' का खेल
पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। वर्ष 2006 में 80 लाख रुपए में खरीदे गए इस क्रूज पर हाल ही में (वर्ष 2024 में) 38 लाख रुपए इसकी मरम्मत (मीडियम रीफीट) पर खर्च किए गए थे।
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स्थानीय स्तर पर मरम्मत: जबलपुर में शिप निर्माण या विशेषज्ञ मरम्मत कंपनी न होने के बावजूद, इंजन और इलेक्ट्रिकल सिस्टम का काम स्थानीय 'जुगाड़' से कराया गया।
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हैदराबाद की कंपनी का इनकार: सूत्रों के अनुसार, एक नामी कंपनी ने इस क्रूज की मरम्मत से हाथ खड़े कर दिए थे, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर ही लीपापोती की गई।
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फिटनेस पर सवाल: यदि 38 लाख खर्च किए गए तो क्रूज फेल क्यों हुआ? और यदि वह अनफिट था, तो उसे सैलानियों के लिए पानी में उतारा ही क्यों गया?
नियमों की धज्जियां और सिस्टम की विफलता
हादसे के वक्त सुरक्षा के न्यूनतम मानकों का भी पालन नहीं किया गया:
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लाइफ जैकेट: क्रूज पर पर्याप्त लाइफ जैकेट होने के बावजूद पर्यटकों को उनका उपयोग नहीं कराया गया।
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इंजन की खराबी: जानकारी मिली है कि क्रूज का एक इंजन पहले से खराब था, फिर भी इसे संचालित किया जा रहा था।
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मौसम की अनदेखी: खराब मौसम और तेज हवाओं के बावजूद बोट क्लब प्रबंधन ने संचालन नहीं रोका।
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प्रशिक्षित स्टाफ का अभाव: मौके पर मौजूद स्टाफ आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए ट्रेंड नहीं था।
जवाबदेही किसकी?
बोट क्लब मैनेजर की अनुपस्थिति और तकनीकी अधिकारियों की निगरानी में कमी के बावजूद टिकट काउंटर खुले रहे और क्रूज चलता रहा। अब सवाल यह है कि क्या राज्य स्तरीय जांच टीम उन अधिकारियों पर कार्रवाई करेगी जिनकी लापरवाही से 13 लोगों की जान गई, या क्रूज को नष्ट करने के साथ ही यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
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