भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के चलते बाजार ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस गिरावट को बाजार विश्लेषकों ने 'ब्लैक ट्यूजडे' का नाम दिया है, जिसमें निवेशकों की करीब 5 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति मिनटों में स्वाहा हो गई।
बाजार का लेखा-जोखा: निफ्टी 22,100 के नीचे
कारोबार के अंत में BSE सेंसेक्स 1,100 अंकों की भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। वहीं, NSE निफ्टी भी संभल नहीं पाया और 22,100 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर को तोड़ते हुए नीचे फिसल गया। बाजार में चौतरफा बिकवाली का माहौल रहा, जिससे स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स भी अछूते नहीं रहे।
गिरावट के 3 मुख्य कारण
बाजार के जानकारों ने आज की इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे निम्नलिखित कारणों को जिम्मेदार ठहराया है:
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ईरान-अमेरिका तनाव: पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती तल्खी ने वैश्विक बाजारों में डर का माहौल पैदा कर दिया है। युद्ध की आशंका ने निवेशकों को जोखिम वाले एसेट्स (शेयरों) से दूर कर दिया है।
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कच्चे तेल में उबाल: तनाव के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित होने के डर से ब्रेंट क्रूड की कीमतें उछल गई हैं। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह महंगाई और चालू खाता घाटे (CAD) की चिंता बढ़ाने वाली खबर है।
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FIIs की भारी बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से आज रिकॉर्ड निकासी की है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती आने के कारण निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश (सोना और डॉलर) की ओर भाग रहे हैं।
आईटी और बैंकिंग सेक्टर पर सबसे ज्यादा मार
आज की गिरावट का नेतृत्व बैंकिंग और आईटी दिग्गजों ने किया।
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बैंकिंग: HDFC बैंक, ICICI बैंक और SBI के शेयरों में 3-4% तक की गिरावट देखी गई, जिससे बैंक निफ्टी बुरी तरह पिटा।
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IT: वैश्विक अनिश्चितता के चलते इंफोसिस, TCS और विप्रो जैसे शेयरों में भी भारी बिकवाली हुई। निवेशकों को डर है कि वैश्विक मंदी आईटी सेक्टर के रेवेन्यू पर असर डाल सकती है।
विशेषज्ञों की सलाह: क्या करें निवेशक?
बाजार विशेषज्ञ अभी 'वेट एंड वॉच' (Wait and Watch) की स्थिति में रहने की सलाह दे रहे हैं।
"बाजार में अभी अस्थिरता बनी रह सकती है। जब तक भू-राजनीतिक हालात स्पष्ट नहीं होते, तब तक एकमुश्त (Lumpsum) निवेश से बचें। अच्छी क्वालिटी के शेयरों में गिरावट पर धीरे-धीरे खरीदारी (SIP) करना ही समझदारी होगी।" — मार्केट एनालिस्ट
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