Wednesday, 25 March 2026
Swaraj Express
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मध्य प्रदेश Bhopal

राजधानी भोपाल: प्रभावशाली राजनेता ने करोड़ों की जमीन कौड़ियों के दाम हड़पी, 2 डिप्टी कलेक्टर भी शामिल; IAS अधिकारी की जमीन पर दर्शाया फर्जी खसरा।

भोपाल के अयोध्या बायपास में 50 करोड़ की जमीन पर घोटाले के आरोप। पीड़ित पक्ष ने राजनेता और अधिकारियों की कथित मिलीभगत से जमीन हड़पने का दावा किया।

भोपाल के अयोध्या बायपास क्षेत्र की एक बहुमूल्य जमीन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि एक प्रभावशाली राजनेता ने सरकारी अधिकारियों से कथित साठगांठ कर लगभग 1.10 लाख वर्गफुट जमीन बेहद कम कीमत पर अपने और साथियों के नाम करा ली। स्थानीय बाजार दर के हिसाब से जमीन की कीमत करीब 50 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

पीड़ित पक्ष का दावा: 1994 से कब्जा और खेती

पीड़ित परिवार का कहना है कि वे वर्ष 1994 से जमीन पर काबिज हैं और खेती करते रहे हैं। उनके पास रजिस्ट्री, बही और कब्जे से जुड़े दस्तावेज मौजूद होने का दावा किया गया है। जमीन मालिक की मृत्यु के बाद 2017-18 में उनके वारिसों ने बंटवारे (बटान) के लिए आवेदन किया था।

बटान प्रक्रिया अटकी, रिश्वत मांगने का आरोप

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि तत्कालीन राजस्व अमले की ओर से जमीन नाप (बटान) के लिए तीन लाख रुपये की मांग की गई थी। पैसे देने से इनकार करने पर रिकॉर्ड में नाम दर्ज नहीं हुआ। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

डिजिटलाइजेशन के दौरान रिकॉर्ड गड़बड़ी का दावा

मामले में यह भी कहा गया है कि प्रदेश में भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के दौरान कई खसरे इधर-उधर चढ़ गए थे। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इसी गड़बड़ी का फायदा उठाकर बाद में जमीन पर खेल शुरू हुआ।

2025 में भू-माफिया की एंट्री का आरोप

पीड़ित परिवार का कहना है कि वर्ष 2025 में कथित भू-माफिया सक्रिय हुए और पड़ोसी के माध्यम से जमीन पर दावा ठोकने की कोशिश हुई, जबकि संबंधित जमीन पहले ही सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित बताई गई थी और मुआवजा भी दिया जा चुका था।

तहसीलदार ने नामांतरण आवेदन किया था खारिज

मार्च 2025 में पोथी नामांतरण (विरासत दर्ज) का आवेदन लगाया गया, जिसे तहसीलदार ने 17 मार्च 2025 को यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि जमीन मौके पर उपलब्ध नहीं है।

एसडीएम के आदेश से पलटा मामला

आरोप है कि पांच महीने बाद तत्कालीन एसडीएम ने तहसीलदार के आदेश को दरकिनार करते हुए पोथी नामांतरण के आदेश दे दिए। इसके बाद प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ी।

कोर्ट ने लगाया था स्टे, फिर भी हुई रजिस्ट्री

पीड़ित पक्ष के अनुसार, जब जमीन बिक्री का सार्वजनिक इश्तिहार निकला तो उन्होंने अदालत की शरण ली। अदालत ने मामले के अंतिम निराकरण तक क्रय-विक्रय पर रोक (स्टे) लगा दी थी। इसके बावजूद 20 जनवरी के बटान आदेश के बाद मात्र 15 दिनों में 3 फरवरी 2025 को जमीन की रजिस्ट्री तीन अलग-अलग लोगों के नाम हो गई, जिनमें एक नाम कथित रूप से एक राजनेता का भी बताया जा रहा है।

हफ्ते भर में नामांतरण, प्रक्रिया पर उठे सवाल

आरोप है कि रजिस्ट्री के एक सप्ताह के भीतर नामांतरण भी कर दिया गया, जबकि सामान्य मामलों में इसमें महीनों लग जाते हैं। इससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

खसरा नंबर को लेकर भी गड़बड़ी का आरोप

पीड़ित पक्ष ने यह भी दावा किया है कि मूल जमीन का खसरा नंबर 198/5/2/1/2 पड़ोस की एक आईएएस अधिकारी की जमीन पर दर्शा दिया गया, जिससे भ्रम की स्थिति बनी।

प्रशासनिक जांच की उठी मांग

मामले में अभी तक आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। पीड़ित परिवार ने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह राजधानी में भूमि प्रबंधन और राजस्व व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

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Comments (3)
A
Anjali
02 Mar 2026

Kaise kaise log hain!

AR
Anshul Rajak
02 Mar 2026

Sachi bat hai!

S
Sharad
02 Mar 2026

Ajib hai!