Monday, 01 June 2026
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'कॉकरोच' टिप्पणी पर विवाद के बाद CJI सूर्यकांत की सफाई: बोले— "मेरा इरादा युवाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था, मीडिया ने गलत पेश किया"

नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान दिए गए 'कॉकरोच' और 'परजीवी' वाले बयान ने देश के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। इस टिप्पणी पर मचे भारी बवाल के बाद सीजेआई ने अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने कहा कि मीडिया के एक हिस्से ने उनकी बातों को गलत संदर्भ में पेश किया है, जिससे उन्हें बेहद दुख पहुँचा है।

क्या था पूरा मामला और विवादित टिप्पणी?

यह पूरा विवाद शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान शुरू हुआ। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ एक वकील की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) का दर्जा पाने की मांग कर रहा था।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वकील की योग्यता पर सवाल उठाते हुए कड़ी फटकार लगाई। इसी दौरान सीजेआई ने एक टिप्पणी करते हुए कहा था:

"कुछ बेरोजगार युवा, सोशल मीडिया यूजर्स और कुछ आरटीआई एक्टिविस्ट बन जाते हैं और फिर सिस्टम पर हमला करना शुरू कर देते हैं, जबकि उनके पास कोई प्रामाणिक डिग्री नहीं होती। ये लोग बिना योग्यता के प्रतिष्ठित पेशों में भी घुसपैठ कर जाते हैं। ऐसे लोग 'कॉकरोच' और 'परजीवी' की तरह होते हैं।"

अदालत ने वकील से यहाँ तक कह दिया कि पूरी दुनिया वरिष्ठ अधिवक्ता बनने के योग्य हो सकती है, लेकिन कम से कम आप इसके पात्र नहीं हैं।

बवाल के बाद CJI ने क्या दी सफाई?

इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर देश के बेरोजगार युवाओं को 'कॉकरोच' कहे जाने के कयास लगाकर सुप्रीम कोर्ट की तीखी आलोचना होने लगी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्टीकरण जारी किया।

सीजेआई ने साफ शब्दों में कहा:

  • उनका इरादा देश के सामान्य युवाओं या बेरोजगारों के खिलाफ टिप्पणी करना बिल्कुल नहीं था।

  • वे भारतीय युवाओं की क्षमता पर गर्व करते हैं और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका का सम्मान करते हैं।

  • उनका इशारा केवल उन गिने-चुने लोगों की तरफ था जो फर्जी डिग्रियों, हेरफेर और गलत तरीकों का सहारा लेकर वकालत जैसे प्रतिष्ठित पेशों की गरिमा को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

सीजेआई ने दुख जताते हुए कहा कि अदालत के भीतर एक खास संदर्भ (Context) में कही गई बात को पूरी तरह तोड़-मरोड़कर पेश किया गया, जिससे समाज में गलत संदेश गया।

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