रिपोर्ट: सागर मिश्रा
कानपुर। शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के दावों के बीच कानपुर की जमीनी तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। शहर के कई इलाकों में टूटी और जर्जर सड़कें, जगह-जगह फैली गंदगी और बदहाल सफाई व्यवस्था लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। विकास और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के दावों के बावजूद मूलभूत सुविधाओं की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है।
शहर की सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे और टूटी सड़कें राहगीरों और वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं। खासकर दोपहिया वाहन चालकों को इन रास्तों पर सफर करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जर्जर सड़कों के कारण हादसे का खतरा भी बना हुआ है।
वहीं दूसरी ओर कई स्थानों पर सफाई व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थानों पर फैली गंदगी के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कूड़े के ढेर से उठने वाली दुर्गंध के साथ-साथ स्थानीय लोगों को बीमारियों के फैलने का डर भी सता रहा है।
करोड़ों के विकास के बीच मूलभूत सुविधाओं पर सवाल
कानपुर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं पर काम किए जाने के दावे किए जाते रहे हैं। लेकिन स्थानीय लोगों का सवाल है कि अगर शहर में सड़क और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं ही दुरुस्त नहीं हैं, तो स्मार्ट सिटी की तस्वीर आखिर कैसी होगी?
लोगों का कहना है कि विकास कार्यों पर पैसा खर्च होने के बावजूद उसका असर शहर के हर हिस्से में दिखाई देना चाहिए। केवल योजनाओं और दावों से शहर स्मार्ट नहीं बन सकता, बल्कि सड़क, सफाई, जल निकासी और अन्य मूलभूत सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था भी जरूरी है।
जनता पूछ रही है—जिम्मेदार कौन?
बदहाल सड़कों और गंदगी को लेकर अब स्थानीय लोगों की नजर जिम्मेदार विभागों पर है। लोगों का सवाल है कि इन समस्याओं के समाधान के लिए आखिर कब ठोस कदम उठाए जाएंगे।
जनता चाहती है कि संबंधित विभाग केवल योजनाएं बनाने और दावे करने तक सीमित न रहें, बल्कि जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान करें। टूटी सड़कों की मरम्मत, नियमित सफाई और सार्वजनिक स्थानों की बेहतर व्यवस्था से ही शहर को वास्तव में स्मार्ट बनाया जा सकता है।
कानपुर की मौजूदा स्थिति अब एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है—दावों में स्मार्ट सिटी और जमीन पर बदहाल कानपुर, आखिर जिम्मेदार कौन?
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