Wednesday, 25 March 2026
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मध्य प्रदेश

कमिश्नर साहब का 'कंसल्टेंट प्रेम' या करोड़ों का भ्रष्टाचार? स्वराज एक्सप्रेस का बड़ा खुलासा!

भोपाल | मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक आईएएस (IAS) अधिकारी की कार्यशैली चर्चा और विवादों का केंद्र बनी हुई है। 'आईएएस' होने के रसूख में डूबे ये साहब न केवल अपने विभाग के मंत्री की बातों को अनसुना कर रहे हैं, बल्कि अपने 'सुपर बॉस' यानी विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (ACS) को भी नाराज करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। मामला करोड़ों रुपये के भुगतान और नियमों को ताक पर रखकर चहेती कंपनियों को उपकृत करने से जुड़ा है।

2014 में खत्म हुआ अनुबंध, 2026 तक जारी है भुगतान

हैरानी की बात यह है कि विभाग में सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा संभाल रही पुरानी सिक्योरिटी कंपनी का अनुबंध साल 2014 में ही समाप्त हो चुका था। इसे 2012 में केवल दो साल के लिए टेंडर के जरिए अनुबंधित किया गया था। लेकिन पिछले 12 सालों से बिना किसी वैध नियम-प्रक्रिया के यह कंपनी विभाग में जमी हुई है। आंकड़ों की मानें तो पिछले 12 वर्षों में इस कंपनी को लगभग 10 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, और वर्तमान में भी करीब 80 लाख रुपये सालाना सरकारी खजाने से इस कंपनी की जेब में जा रहे हैं।

नई कंपनी को टेंडर मिलने के बाद भी 'खेल' जारी

साहब ने पिछले साल विभाग में कमिश्नर और निगम के एमडी का पद संभालते ही सुरक्षा व्यवस्था के लिए नया टेंडर जारी किया था। मई 2025 में पूरी प्रक्रिया अपनाने के बाद एक दूसरी कंपनी को 'लोवेस्ट रेट' (L1) के आधार पर टेंडर आवंटित भी कर दिया गया। लेकिन टेंडर मिलने के बावजूद आज करीब एक साल बीतने को है, नई कंपनी को काम नहीं दिया गया। सूत्र बताते हैं कि कमिश्नर साहब को 'खुश' करने के चक्कर में पुरानी कंपनी का ही कब्जा बरकरार है।

खास 'कंसल्टेन्ट' और आउटसोर्सिंग का मोह

साहब का विवादों से नाता यहीं खत्म नहीं होता। चर्चा है कि उन्हें सरकारी अमले से ज्यादा प्राइवेट कंसल्टेन्ट्स पर भरोसा है। वे जिस भी विभाग में जाते हैं, अपने साथ एक 'पसंदीदा' कंसल्टेन्ट को जरूर ले जाते हैं। स्वराज एक्सप्रेस की छानबीन में खुलासा हुआ है कि उक्त कंसल्टेन्ट के कर्मचारियों का वेतन भी आउटसोर्सिंग के नाम पर विभाग से ही निकलवाया जाता है। विभाग के कर्मचारियों के बीच अब यह फुसफुसाहट आम हो गई है कि यह खास कंसल्टेन्ट साहब के लिए 'बिचौलिए' की भूमिका निभाता है।

कौन हैं ये 'साहब'?

प्रशासनिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म है। बताया जा रहा है कि साहब 2007 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। वे चंबल-ग्वालियर संभाग के एक महत्वपूर्ण जिले के कलेक्टर भी रह चुके हैं और उनका नाम काफी लंबा है।

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