नई दिल्ली। दिल्ली के बहुचर्चित आबकारी नीति मामले में एक बार फिर कानूनी अड़चन सामने आई है। ट्रायल कोर्ट द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित 22 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ सीबीआई (CBI) की याचिका पर सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी।
सुनवाई टलने का कारण
सोमवार को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच के न बैठने के कारण इस महत्वपूर्ण मामले को टाल दिया गया। इससे पहले कोर्ट ने केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक के प्रतिनिधियों से कानूनी सहायता के लिए 'एमिकस क्यूरी' (न्याय मित्र) नियुक्त करने पर सहमति मांगी थी।
केजरीवाल का 'सत्याग्रह' और बहिष्कार
इस मामले में मोड़ तब आया जब अरविंद केजरीवाल और 'आप' नेताओं ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कोर्ट की कार्यवाही का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया। आरोपियों ने बेंच पर भरोसा न होने की बात कहते हुए 'सत्याग्रह' का रास्ता अपनाने का फैसला किया है। हालांकि, जस्टिस शर्मा पहले ही साफ कर चुकी हैं कि वह किसी भी दबाव में आए बिना निष्पक्ष न्याय करेंगी। अब कोर्ट को यह तय करना है कि आरोपियों की अनुपस्थिति में सुनवाई कैसे आगे बढ़ेगी।
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