Sunday, 20 September 2026
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छत्तीसगढ़ में ईवी क्रांति: भूमि विकास नियमों में बड़ा बदलाव, अब राजमार्गों पर हर 25 KM में खुलेंगे चार्जिंग स्टेशन और CNG पंप

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने और हरित ऊर्जा को मजबूती देने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए नई अधिसूचना जारी की है। अब राज्य की हर प्रस्तावित सड़क, राष्ट्रीय राजमार्ग और राज्य मार्ग पर इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग सेंटर और सीएनजी (CNG) पंप खोलना अनिवार्य होगा।

भविष्य की जरूरतों के लिए बदली गाइडलाइन

आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा जारी इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य में सीमित ईवी चार्जिंग नेटवर्क की समस्या को दूर करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से उन लोगों का भरोसा बढ़ेगा जो चार्जिंग सुविधाओं के अभाव में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से हिचक रहे थे।

नई व्यवस्था के प्रमुख बिंदु और मानक:

सरकार ने चार्जिंग स्टेशनों और सीएनजी केंद्रों के लिए जमीन और सुरक्षा के कड़े मापदंड तय किए हैं:

  • भूमि की आवश्यकता: फास्ट चार्जिंग स्टेशन (FCBCS) के लिए न्यूनतम 15 x 7 मीटर और सामान्य पब्लिक चार्जिंग स्टेशन (PCS) के लिए 13.5 x 5.5 मीटर जमीन होना अनिवार्य होगा।

  • सड़क की चौड़ाई: ये केंद्र केवल उन सड़कों पर बनाए जा सकेंगे जिनकी चौड़ाई 30 मीटर से अधिक है।

  • आधुनिक तकनीक: चार्जिंग स्टेशनों में क्लाइमेट कंट्रोल इक्विपमेंट और लिक्विड कूल्ड केबल जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं का होना अनिवार्य है।

  • सुरक्षा मानक: सभी केंद्रों के लिए विस्फोटक एवं अग्नि सुरक्षा विभाग (Fire Safety Department) से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

लंबी दूरी की यात्रा होगी आसान

राजमार्गों पर सफर करने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए सरकार ने विशेष प्रावधान किए हैं:

  • हर 25 किलोमीटर पर एक पब्लिक चार्जिंग स्टेशन (PCS) स्थापित किया जाएगा।

  • हर 100 किलोमीटर पर हाई-स्पीड फास्ट चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जाएंगे। इससे लंबी दूरी तय करने वाले ईवी चालकों को 'रेंज एंग्जायटी' (बैटरी खत्म होने का डर) से मुक्ति मिलेगी।

निजी निवेश को मिलेगा बढ़ावा

नई नीति के तहत शहरी क्षेत्रों, माल परिवहन कॉम्प्लेक्स और विकास केंद्रों के रूप में चिह्नित गांवों में भी चार्जिंग स्टेशन और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन स्थापित किए जा सकेंगे। इससे न केवल पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि राज्य में निजी निवेश के नए रास्ते भी खुलेंगे और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

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