Sunday, 20 September 2026
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नेपाल में बाढ़ का कहर: मृतकों की संख्या 1,252 पहुंची, 4,875 लोग अब भी लापता

 

नौवें दिन भी जारी है राहत और बचाव अभियान, प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन से जोड़ा आपदा का संबंध

नेपाल में विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद राहत और बचाव अभियान नौवें दिन भी जारी है। गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,252 हो गई। प्रभावित इलाकों से लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं, जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार, लापता लोगों की संख्या 4,875 आंकी गई है।

यह विनाशकारी फ्लैश फ्लड 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुए बर्फ-पत्थर के हिमस्खलन के बाद आई थी। इस आपदा ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया और बड़ी संख्या में लोग लापता हो गए।

कई जिलों में बरामद हुए शव

नेपाल पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, चितवन जिले से 355 शव बरामद किए गए हैं। नवलपरासी ईस्ट से 218 और नवलपरासी वेस्ट से 208 शव बरामद हुए हैं। इनमें भारत से बरामद कर नवलपरासी वेस्ट को सौंपे गए 18 शव भी शामिल हैं।

नुवाकोट से 177, रसुवा से 127, गोरखा से 69, धादिंग से 60 और तनाहुन से 38 शव बरामद किए गए हैं।

नौवें दिन भी खोज और बचाव अभियान जारी

नेपाल सेना के नेतृत्व में संयुक्त बचाव दल गुरुवार को नौवें दिन भी खोज और बचाव अभियान में जुटे रहे। हजारों लोगों के लापता होने के कारण प्रभावित क्षेत्रों में अभियान लगातार जारी है।

संयुक्त राष्ट्र ने भी नेपाल में बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने को बेहद चुनौतीपूर्ण बताया है। सड़कों के नष्ट होने के कारण बुनियादी राहत सामग्री पहुंचाने में मुश्किलें आ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र ने प्रभावित क्षेत्रों तक सहायता पहुंचाने के लिए कार्गो ड्रोन और पोर्टरों के इस्तेमाल पर भी विचार किया है।

प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन से जोड़ा आपदा का संबंध

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने कहा कि इस आपदा के जलवायु परिवर्तन से संबंध को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने मजबूती से उठाया जाना चाहिए। पिछले सप्ताह आई फ्लैश फ्लड के बाद लापता लोगों के परिवारों द्वारा प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार भी किए गए।

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने इस भीषण बाढ़ को "हिमालयन सुनामी" बताया। उन्होंने इस कठिन समय में पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मिल रहे सहयोग और एकजुटता के लिए आभार व्यक्त किया।

भारत ने भेजी राहत सामग्री

भारत ने नेपाल में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत सामग्री भेजना जारी रखा है। 2 सितंबर को भारत ने आवश्यक दवाओं की पांचवीं खेप नेपाल पहुंचाई। इसमें 5.5 टन चिकित्सा सामग्री शामिल थी। इसके साथ 11 सदस्यीय बचाव दल भी भेजा गया।

भारत की ओर से भेजी गई चिकित्सा सामग्री में एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक दवाएं, सर्जिकल सामान और अन्य जरूरी दवाएं शामिल थीं। अब तक 166 भारतीय नागरिकों को बचाया जा चुका है।

चीन ने भी भेजी सहायता

चीन ने भी नेपाल में आई बाढ़ के बाद तीसरी खेप में राहत सामग्री भेजी है। इसमें टेंट, कंबल, चिकित्सा सुरक्षा सूट और सैटेलाइट संचार उपकरण शामिल हैं।

चीन मौसम प्रशासन और नेपाल के मौसम अधिकारियों के बीच वीडियो मौसम परामर्श और वास्तविक समय में सूचना साझा करने का काम भी जारी है।

नेपाल में शुरुआती चेतावनी प्रणाली फिर बनाने की तैयारी

नेपाल चीन सीमा के कुछ हिस्सों में भूस्खलन के लिए शुरुआती चेतावनी प्रणाली को फिर से बनाने की योजना बना रहा है। इसके तहत भूकंपीय सेंसर, कैमरे और सैटेलाइट लिंक लगाए जाने की योजना है।

यह उपकरण चीन सीमा के पास रसुवा जिले के तिमुरे में लगाए जा रहे हैं। इसी नदी क्षेत्र में एक ग्लेशियर के टूटने से मिट्टी, पानी और चट्टानों की विशाल लहर पहाड़ी घाटियों में बह गई थी।

हिमालय में ग्लेशियरों का पिघलना बना बड़ा खतरा

संयुक्त राष्ट्र की एक वैज्ञानिक रिपोर्ट के लेखक ने कहा कि जलवायु परिवर्तन ग्लेशियरों के नुकसान को तेज कर रहा है और हिमालय में बाढ़ जैसी विनाशकारी घटनाओं का खतरा बढ़ा रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने का लक्ष्य निश्चित रूप से पार होने वाला है और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

नेपाल की इस विनाशकारी आपदा ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन, शुरुआती चेतावनी प्रणाली और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

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