गुना। मध्यप्रदेश के गुना जिले में गुरुवार को किसानों की समस्याओं को लेकर सियासी तापमान उफान पर रहा। पूर्व मंत्री और राघौगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह के नेतृत्व में जिला कांग्रेस कमेटी ने नेशनल हाईवे-46 (बायपास तिराहे) पर विशाल चक्काजाम और विरोध प्रदर्शन किया। खाद की किल्लत, बिजली संकट और फसल भुगतान में देरी जैसे मुद्दों को लेकर हजारों की संख्या में किसान और कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए, जिससे हाईवे के दोनों ओर वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं।
ट्रैक्टर चलाकर धरना स्थल पहुंचे जयवर्धन, कार्यकर्ताओं में भरा जोश
आंदोलन की शुरुआत तब और प्रभावी हो गई जब विधायक जयवर्धन सिंह खुद ट्रैक्टर चलाकर किसानों के साथ धरना स्थल पर पहुंचे। उनके इस अंदाज ने कार्यकर्ताओं और किसानों में नया उत्साह भर दिया। बायपास तिराहे पर आयोजित सभा में जयवर्धन सिंह ने सरकार को घेरते हुए कहा कि अन्नदाता आज खाद और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए दर-दर भटक रहा है, लेकिन प्रशासन मौन साधे बैठा है।
खाद की किल्लत और भुगतान में देरी पर सरकार के खिलाफ तीखे तेवर
सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश में डीएपी और यूरिया खाद की भारी किल्लत है। ऑनलाइन व्यवस्था की जटिलता के कारण छोटे किसान खाद हासिल करने में असमर्थ हैं। इसके अलावा, मंडियों में तौल में कटौती और 'रिजेक्ट' के नाम पर किसानों के शोषण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। कांग्रेस ने मांग की कि ई-उपार्जन प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और गेहूं खरीदी का भुगतान अधिकतम सात दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए।
हाईवे पर घंटों लगा रहा जाम, भारी पुलिस बल रहा तैनात
प्रदर्शन के कारण नेशनल हाईवे-46 पर यातायात पूरी तरह ठप रहा। चक्काजाम की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। मौके पर एडीएम, एसडीएम, एएसपी और सीएसपी सहित कई थानों का भारी पुलिस बल तैनात रहा। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन किसान और कार्यकर्ता अपनी मांगों पर अड़े रहे। घंटों तक चले इस प्रदर्शन ने जिले की यातायात व्यवस्था को प्रभावित किया।
बिजली-पानी और फसल बीमा: मांगों की लंबी फेहरिस्त और चेतावनी
कांग्रेस ने सरकार के सामने मांगों का ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा। मुख्य मांगों में फसल बीमा का समय पर मुआवजा, केसीसी ऋण (KCC Loan) की अवधि बढ़ाना, और सिंचाई के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति शामिल है। वक्ताओं ने कहा कि बढ़ती लागत और घटते लाभ के कारण खेती अब घाटे का सौदा बनती जा रही है, जिसके लिए सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं।
रिपोर्ट:मनोहर प्रजापति
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