गुना। मध्य प्रदेश के गुना जिले के बमोरी विकासखंड के अंतर्गत आने वाले शासकीय माध्यमिक विद्यालय विट्ठलपुर में अतिथि शिक्षक की नियुक्ति और मानदेय भुगतान को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि वर्तमान में बमोरी तहसीलदार के पद पर पदस्थ देवदत्त गोलियां की पत्नी मंजू गोलियां ने स्कूल में उपस्थित हुए बिना ही अतिथि शिक्षक के रूप में पूरे एक सत्र का मानदेय प्राप्त किया है। इस खुलासे के बाद स्थानीय ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
बिना उपस्थिति 7 माह का मानदेय निकालने का आरोप
मामला सत्र 2024-25 का बताया जा रहा है, जिसमें मंजू गोलियां को विट्ठलपुर स्कूल में अतिथि शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था। स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों का दावा है कि नियुक्ति के बाद से ही मंजू गोलियां स्कूल में नियमित रूप से उपस्थित नहीं हुईं। आरोप है कि उन्होंने बच्चों को पढ़ाए बिना ही प्रभावशाली संपर्कों के चलते पूरे 7 माह का मानदेय प्राप्त कर लिया।
तहसीलदार के पद और प्रभाव के दुरुपयोग का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि बमोरी तहसीलदार देवदत्त गोलियां ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी पत्नी को यह अनुचित लाभ पहुँचाया है। लोगों का तर्क है कि जहाँ एक ओर सामान्य अभ्यर्थियों को अतिथि शिक्षक बनने और अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए कड़े नियमों और संघर्षों से गुजरना पड़ता है, वहीं एक प्रभावशाली अधिकारी की पत्नी को बिना स्कूल आए सरकारी खजाने से वेतन दिया जा रहा है।
जांच की मांग: उपस्थिति पंजी और रिकॉर्ड खंगालने की अपील
नाराज ग्रामीणों ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि स्कूल की उपस्थिति पंजी (Attendance Register), अध्यापन रिकॉर्ड और मानदेय भुगतान की फाइलों की बारीकी से जांच की जाए, तो यह बड़ा भ्रष्टाचार उजागर हो सकता है। ग्रामीण अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि यदि कोई शिक्षक स्कूल पहुंचा ही नहीं, तो संकुल केंद्र और संबंधित विभाग ने किस आधार पर उनके भुगतान की फाइल को मंजूरी दी।
शिक्षा विभाग के मौन पर सवाल
इस मामले ने शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। चर्चा है कि विभाग के छोटे से लेकर बड़े कर्मचारियों तक को इस अनियमितता की जानकारी थी, लेकिन 'साहब' की पत्नी होने के कारण किसी ने आपत्ति नहीं उठाई। अब स्थानीय लोग इस मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों और कलेक्टर से करने की तैयारी में हैं, ताकि सरकारी धन के इस दुरुपयोग पर रोक लग सके और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई हो।
रिपोर्ट: मनोहर प्रजापति, न्यूज़ डेस्क
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