गुना। एक ओर सरकार किसानों की आय दोगुनी करने और समर्थन मूल्य पर सुगम खरीदी के दावे कर रही है, वहीं गुना जिले के नानाखेड़ी शासकीय गेहूं तौल केंद्र से आई तस्वीरें और आरोप जमीनी हकीकत की कलई खोल रहे हैं। यहाँ किसानों ने तौल केंद्र के कर्मचारियों और दलालों पर खुलेआम रिश्वतखोरी और अभद्र व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं।
"5 हजार दो, तभी तौलेगा गेहूं": किसान रामा बंजारा का दर्द
तौल केंद्र पर पिछले चार दिनों से अपनी ट्राली लेकर खड़े पीड़ित किसान रामा बंजारा ने व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसान का कहना है कि लगातार मिन्नतें करने के बाद जब आज आधा गेहूं तौला गया, तो अचानक कर्मचारियों ने 'गेहूं खराब है' कहकर कांटा बंद कर दिया। आरोप है कि बाद में उनसे साफ तौर पर 5,000 रुपये की मांग की गई और कहा गया कि पैसे देने पर ही पूरा गेहूं तौला जाएगा।
दलालों का कब्जा और किसानों के साथ धक्का-मुक्की
मौके पर मौजूद किसानों का कहना है कि तौल केंद्र अब वसूली का अड्डा बन चुका है। यहाँ बिना सिफारिश और रिश्वत के काम होना मुमकिन नहीं है। किसानों ने आरोप लगाया कि केंद्र पर दलाल सक्रिय हैं जो खुलेआम पैसों की मांग करते हैं। विरोध करने पर किसानों के साथ धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार किया जाता है, जिससे अन्नदाता खुद को अपमानित महसूस कर रहा है।
कर्मचारी की दबंगई: "कलेक्टर के पास जाओ, मेरा नाम बता देना"
मामले में एक नया मोड़ तब आया जब एक एमपीईबी (MPEB) कर्मचारी, जिसका रिश्तेदार वहां कार्यरत है, किसानों से उलझ गया। वायरल वीडियो में कर्मचारी दबंगई दिखाते हुए किसानों से कहता नजर आ रहा है— "कलेक्टर के पास चले जाओ, मेरा नाम बता देना… देखता हूं कौन क्या कर लेता है।" सरकारी तंत्र से जुड़े व्यक्ति का यह बयान प्रशासन की कार्यशैली और कर्मचारियों के बेलगाम रवैये पर बड़े सवाल खड़ा करता है।
भीषण गर्मी और अव्यवस्थाओं की मार
भ्रष्टाचार के साथ-साथ किसान कुप्रबंधन की मार भी झेल रहे हैं। भीषण गर्मी के बावजूद तौल केंद्रों पर न तो पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही छांव की। कई-कई दिनों तक भूखे-प्यासे कतार में खड़े रहने के बाद भी जब उनसे रिश्वत मांगी जाती है, तो किसानों का सब्र टूट जाता है।
कलेक्टर तक पहुँचा मामला, निष्पक्ष जांच की मांग
किसानों ने इस पूरे घटनाक्रम और कथित वसूली के वीडियो जिला कलेक्टर को भेज दिए हैं और फोन के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई है। अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन इन वीडियो और साक्ष्यों के आधार पर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करेगा, या फिर हर बार की तरह यह मामला भी रसूखदारों के दबाव में फाइलों में दबकर रह जाएगा?
फिलहाल, नानाखेड़ी तौल केंद्र पर किसानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है और वे न्याय के लिए प्रशासन की ओर ताक रहे हैं।
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