गुना। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मध्यभारत प्रांत के 15 दिवसीय घोष वर्ग का भव्य प्रकट कार्यक्रम एवं समापन समारोह शुक्रवार (15 मई 2026) को न्यू टेकरी रोड स्थित गुरुदेव पब्लिक स्कूल में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में प्रांत के विभिन्न जिलों से आए घोष साधकों (स्वयंसेवकों) ने सामूहिक घोष प्रदर्शन किया। घोष की सुरीली धुनों और अनुशासन ने वहां उपस्थित विशाल जनसमूह का मन मोह लिया।
'पंच परिवर्तन' में 'स्व' का भाव सबसे महत्वपूर्ण
समारोह के मुख्य वक्ता मध्यभारत प्रांत के सह प्रांत संघचालक डॉ. राजेश सेठी ने अपने संबोधन में 'स्व' के भाव पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के प्रत्येक नागरिक को अपने राष्ट्र के प्रति “स्व” का भाव रखना होगा, तभी वास्तविक समाज परिवर्तन संभव है। डॉ. सेठी ने कहा:
"राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इसी कारण 'स्व' के भाव को अपने 'पंच परिवर्तन' के संकल्प में प्रमुख स्थान दिया है। 'स्व' का सीधा अर्थ है — अपने देश पर गर्व, अपनी संस्कृति पर मान और अपने पूर्वजों पर अटूट अभिमान।"
अमृतकाल में गिलहरी जैसा योगदान दें नागरिक
डॉ. सेठी ने कहा कि वर्तमान समय भारत का अमृतकाल है और देश पुनः विश्वगुरु बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। उन्होंने आह्वान किया कि देश के प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र निर्माण में गिलहरी के समान अपना छोटा लेकिन महत्वपूर्ण योगदान देना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल “भारत माता की जय” का नारा लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि देशप्रेम को अपने दैनिक आचरण में उतारना आवश्यक है।
उन्होंने संघ की 100 वर्ष की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समय केवल उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का है। संघ समाज जीवन में संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की पाठशाला है, जहां अहंकार का त्याग करके कार्य किया जाता है।
राष्ट्र धर्म ही सर्वोच्च धर्म: आचार्य विनय गोस्वामी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाप्रभु मंदिर, कोटा (राजस्थान) के आचार्य विनय गोस्वामी जी महाराज ने 'राष्ट्र धर्म' को सर्वोच्च बताया। उन्होंने कहा कि यदि देश का हर नागरिक राष्ट्र धर्म को धारण कर ले, तो दुनिया की कोई भी शक्ति भारत का अहित नहीं कर सकती। घोष की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि घोष कंठ से निकला दिव्य स्वर है और भगवान शंकर का डमरू भी इसी घोष का स्वरूप है।
घोष की धुनों पर बनी 'प्रभु श्रीराम' की आकृति
इस प्रकट कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण स्वयंसेवकों द्वारा घोष की सुरीली धुनों के साथ मैदान पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की भव्य आकृति का निर्माण करना रहा, जिसने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इसके अलावा कार्यक्रम स्थल पर महापुरुषों के संदेशों पर आधारित एक प्रेरक चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई थी।
इस गरिमामयी कार्यक्रम के मंच पर विभाग संघचालक अशोक सिंह कुशवाह एवं जिला संघचालक गिर्राज अग्रवाल भी उपस्थित रहे। पूरे 15 दिवसीय वर्ग (1 मई से 15 मई) का प्रतिवेदन वर्ग कार्यवाह मनमोहन किरार ने प्रस्तुत किया, जबकि कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन प्रबंध प्रमुख मनोज भदौरिया द्वारा किया गया।
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