गुना/बमोरी। खेती के सीजन में खाद की किल्लत और व्यवस्थागत खामियों ने किसानों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। बमोरी क्षेत्र के बाघेरी खाद गोदाम पर सोमवार को उस वक्त भारी हंगामा हो गया, जब घंटों कतार में खड़े रहने के बाद भी किसानों को खाद नहीं मिली। ई-टोकन होने के बावजूद खाद न मिलने से नाराज सैकड़ों किसानों ने सड़क पर उतरकर चक्काजाम कर दिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
ई-टोकन ने बढ़ाई मुश्किलें: "टोकन हाथ में, पर गोदाम खाली"
प्रदर्शनकारी किसानों का आरोप है कि सरकार की डिजिटल व्यवस्था उनके लिए जी का जंजाल बन गई है। किसानों ने बताया कि बड़ी मुश्किल से ई-टोकन पोर्टल से टोकन जनरेट होते हैं, लेकिन जब वे गोदाम पहुँचते हैं, तो कभी तकनीकी खराबी तो कभी स्टॉक खत्म होने का बहाना बनाकर उन्हें खाली हाथ लौटा दिया जाता है। चक्काजाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे आम राहगीरों को भी परेशानी हुई।
तकनीकी त्रुटि या लापरवाही? विभाग की सफाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए कृषि विभाग के अधिकारियों ने सफाई दी है कि ई-टोकन पोर्टल पर तकनीकी त्रुटि (Technical Error) के कारण डाटा गलत अपडेट हो गया था। अधिकारियों के मुताबिक, उपलब्ध स्टॉक से कहीं अधिक संख्या में टोकन जारी हो गए, जिससे यह अव्यवस्था फैली। जिन किसानों के टोकन की वैधता आज समाप्त हो रही है, उनके लिए भोपाल स्थित वरिष्ठ कार्यालय को पत्र लिखकर समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया गया है।
विधायक ऋषि अग्रवाल का कड़ा रुख: "कल खाद नहीं मिली तो मैं खुद बैठूंगा धरने पर"
चक्काजाम की सूचना मिलते ही बमोरी विधायक ऋषि अग्रवाल ने मोर्चा संभाला। उन्होंने तुरंत संबंधित अधिकारियों से फोन पर चर्चा की और किसानों की समस्या का समाधान न होने पर कड़ी नाराजगी जताई। विधायक ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा— "किसानों के साथ यह व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कल सुबह तक प्रभावित किसानों को खाद उपलब्ध नहीं कराई गई, तो मैं स्वयं किसानों के साथ सड़क पर बैठकर आंदोलन करूंगा।"
प्रशासन के आश्वासन पर खुला जाम
विधायक और प्रशासनिक अधिकारियों से मिले ठोस आश्वासन के बाद किसान शांत हुए और चक्काजाम समाप्त किया गया। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि तकनीकी खामी को दूर कर कल प्राथमिकता के आधार पर खाद वितरण किया जाएगा। फिलहाल यातायात सुचारू है, लेकिन किसानों में व्यवस्थागत लापरवाही को लेकर अब भी गहरा असंतोष है।
रिपोर्ट: मनोहर प्रजापति, न्यूज़ डेस्क
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