इंदौर/धार। मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित विवादास्पद भोजशाला परिसर को लेकर इंदौर हाई कोर्ट की डबल बेंच ने शुक्रवार (15 मई 2026) को एक युगांतरकारी फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि भोजशाला एक मंदिर है और हिंदू समाज को वहां नियमित पूजा-अर्चना करने का पूर्ण अधिकार है। इसके साथ ही, सालों से चली आ रही नमाज की व्यवस्था को समाप्त करते हुए मुस्लिम पक्ष को कहीं और जमीन देने का सुझाव दिया गया है।
ASI सर्वे बना फैसले का आधार
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की 98 दिनों की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट को मुख्य आधार बनाया। कोर्ट ने कहा कि सर्वे में मिले शिलालेख, संस्कृत और नागरी लिपि के साक्ष्य, और स्थापत्य संरचनाएं इस बात की पुष्टि करती हैं कि यह परिसर प्राचीन 'सरस्वती कंठाभरण' (संस्कृत शिक्षा का केंद्र) और मां वाग्देवी का मंदिर था।
कोर्ट के फैसले की 5 बड़ी बातें:
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धार्मिक स्वरूप तय: भोजशाला परिसर को आधिकारिक तौर पर मंदिर घोषित किया गया है।
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पूजा का अधिकार: हिंदुओं को परिसर में नियमित पूजा करने का अधिकार मिला। 7 अप्रैल 2003 का वह आदेश रद्द कर दिया गया है जिसमें नमाज की अनुमति दी गई थी।
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नमाज पर रोक और वैकल्पिक जमीन: अब से परिसर में नमाज नहीं होगी। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए धार में ही किसी अन्य स्थान पर जमीन आवंटित की जाए।
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वाग्देवी की मूर्ति की वापसी: लंदन के म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा को वापस लाने के लिए केंद्र सरकार को प्रयास करने और इस संबंध में याचिकाकर्ताओं के अनुरोध पर विचार करने को कहा गया है।
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ASI का नियंत्रण: भोजशाला परिसर की देखरेख और सुरक्षा का जिम्मा फिलहाल ASI के पास ही रहेगा।
विष्णु शंकर जैन का बयान: "सत्य की जीत हुई"
हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि कोर्ट ने माना है कि यह स्थान राजा भोज का है। उन्होंने कहा, "ASI का वह आदेश जो नमाज का अधिकार देता था, उसे पूरी तरह रद्द कर दिया गया है। अब वहां केवल हिंदू पूजा ही होगी।"
मुस्लिम पक्ष जाएगा सुप्रीम कोर्ट
दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले पर असंतोष व्यक्त किया है। उनके अधिवक्ताओं ने तर्क दिया था कि यह याचिका हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र (अनुच्छेद 226) में नहीं आती और सर्वे की वीडियोग्राफी स्पष्ट नहीं थी। मुस्लिम पक्ष ने स्पष्ट किया है कि वे इस फैसले को चुनौती देने के लिए जल्द ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
प्रशासन अलर्ट: शांति की अपील
फैसले के बाद धार और इंदौर के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना और एसपी सचिन शर्मा खुद स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। पुलिस ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने वालों को सख्त चेतावनी दी है और कई स्थानों पर फ्लैग मार्च किया जा रहा है।
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