Tuesday, 21 April 2026
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ऐतिहासिक कदम: 2029 चुनाव से पहले लागू होगा महिला आरक्षण, संसद का 3 दिवसीय विशेष सत्र 16 अप्रैल से

भारत के संसदीय इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। केंद्र सरकार ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण कानून 2023) को आगामी 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले प्रभावी बनाने के लिए कमर कस ली है। इसके लिए संसद का एक विशेष 3 दिवसीय सत्र 16, 17 और 18 अप्रैल को बुलाया गया है।

क्या है मुख्य उद्देश्य?

2023 में पारित मूल कानून के अनुसार, आरक्षण को जनगणना और परिसीमन (Delimitation) के बाद ही लागू किया जाना था, जिससे इसमें 2034 तक की देरी होने की संभावना थी। अब सरकार संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम में बदलाव कर इसे 'फास्ट-ट्रैक' मोड पर ला रही है। नए संशोधनों का लक्ष्य परिसीमन प्रक्रिया को 2011 की जनगणना के आधार पर ही पूरा करना है, ताकि इसे 2029 के चुनावों से पहले जमीन पर उतारा जा सके।

प्रस्तावित बदलावों की बड़ी बातें:

  • लोकसभा सीटों में इजाफा: नए प्रस्ताव के तहत लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती है।

  • महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें: सीटों के विस्तार के बाद, कुल 816 सीटों में से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी (यानी कुल सीटों का एक-तिहाई)।

  • वर्टिकल कोटा: आरक्षित सीटों के भीतर ही अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की महिलाओं के लिए भी आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

  • राज्यों में भी लागू: यह आरक्षण न केवल लोकसभा, बल्कि सभी राज्यों की विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में भी समान रूप से लागू होगा।

पीएम मोदी का संबोधन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल दिल्ली में 'नारी शक्ति वंदन सम्मेलन' के दौरान कहा कि संसद एक नया इतिहास रचने की दहलीज पर है। उन्होंने विपक्ष से सहयोग की अपील करते हुए कहा, "यह संशोधन हमारे अतीत के संकल्पों और भविष्य की आकांक्षाओं को पूरा करेगा। हम चाहते हैं कि 2029 का चुनाव नारी शक्ति की नई भागीदारी के साथ लड़ा जाए।"

राजनीतिक हलचल और विपक्ष का रुख

जहाँ सत्ता पक्ष ने सांसदों को 'थ्री-लाइन व्हिप' जारी कर सत्र में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने को कहा है, वहीं विपक्षी दलों ने प्रक्रिया में 'जल्दबाजी' को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि इस पर चर्चा के लिए 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। विपक्ष का मुख्य तर्क यह है कि बिना नई जनगणना के परिसीमन करना संवैधानिक रूप से जटिल हो सकता है।

 

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