Mp News:मौजूदा समय मे एक वरिष्ठ मंत्री का नुस्का मंत्रालय के गलियारों मे चर्चा का विषय बना हुआ है...क्योकि मंत्री जी ने अपने विभाग मे न हींग लगे न फिटकिरी और रंग चोखा वाली रणनीति अपना रखी है...जी हां न मुख्यमंत्री के अनुमोदन की आवश्यकता और न ही आईएएस लाबी का कोई रोड़ा ...और काम ऐसा की सामने वाला अफसर मंत्री जी के आदेश पर सिवाय एस.सर कहने के अलावा कुछ बोलने की हिमाकत तक नहीं कर सकता...अब आप सोच रहे होगे कि मंत्री जी ने ऐसी कौन सी जदू की छड़ी घुमाई कि उनके द्वारा मनमाफिक पोस्टिंग किये जाने पर भी न तो मुख्यमंत्री सचिवालय का बैरियर लगता है और न ही सचिवालय मे विराजमान प्रमुख सचिव के कलम की कारस्तानी आड़े आती है..तो जानिये मंत्री जी के चतुराई का खेल ...मंत्री जी एक इन्जीनियरिंग विभाग के मंत्री है यानि जिन विभागों मे सिवल इन्जीनियरो का ही ज्यादा से ज्यादा काम होता है या यू कहें कि उनका ही बोलबाला होता है.. उसी विभाग के मंत्री है...ऐसे मे मंत्री जी ने हाई कोर्ट से प्रमोशन मे लगी रोक का फायदा उठाते हुए मुख्य अभियंन्ता के पद का प्रभार कार्यपालन यंत्रियों को सौप रहे हैं...अर्थात सीधे दो पद ऊपर .. जबकि भोपाल मुख्यालय मे ही आधा दर्जन भर मुख्य अभियंता पहले से काम कर रहे है...लेकिन उनसे बाबूगीरी काम लिया जा रहा है...यानि उनके पास कोई काम नहीं है.. हालांकि प्रमोशन का मामला कोर्ट मे होने के कारण जहां भी मुख्य अभियन्ता फील्ड मे काम कर रहे है उनका मूल पद अधीक्षण यंत्री का ही है...मगर कार्यपालन यंत्री मुख्य अभियन्ता के प्रभार पर पदस्थ हो यह निर्णय तो अनोखा और अद्भुत है...यहां गौर करने वाली बात यह है कि जिन तीन कार्यपालन यंत्री को मुख्य अभियन्ता का प्रभार हाल ही में सौपा गया है उनके खिलाफ भ्रस्टाचार की जांच चल रही है...इसलिये उनकी डीई चलने के कारण उनका अधीक्षण यंत्री के पद प्रमोशन नही हुआ...और वो मंत्री जी के मेहरबानी के चलते मुख्य अभियन्ता के प्रभार पर हैं. .अब जानिये कि कैसे उनको मुख्य अभियन्ता का प्रभार सौपा जा रहा है..तो मंत्री जी सीधे विभाग के प्रमुख अभियन्ता को निर्देश देते है और बिना किसी रोक टोक के प्रमुख अभियन्ता अपने ही हस्ताक्षर से कार्यपालन यंत्री को मुख्य अभियन्ता का प्रभार सौपे जाने का आदेश जारी कर देते है..आदेश भी ऐसे निकाला जा रहा है कि अमुक कार्यपालन यंत्री को भोपाल दिनांक 22.7.2004 के प्रावधानो के अनुक्रम मे कार्यपालन यंत्री (सिविल) प्राभारी अधीक्षण यंत्री को अपने वर्तमान दायित्वों के साथ साथ कार्यों के सुचारु संपादन हेतु अस्थाई रुप से आगामी आदेश तक वैकल्पिक व्यवस्था के अन्तर्गत मुख्य अभियन्ता के रिक्त पद का अतिरिक्त प्रभार सौपा जाता है.. .जबकि विधिवत आदेश विभाग के डिप्टी सेकेट्री या अन्डर सेकेट्री के दस्तखत से जारी होना चाहिये...जबकि संभाग मे मुख्य अभियन्ता को पदस्थ किये जाने के लिये मुख्यमंत्री के अनुमोदन के साथ साथ विभाग के प्रमुख सचिव की फाइल पर स्वीकृति होना अनिवार्य है....अब आप खुद सोचिये कि जब मंत्री जी दो पोस्ट नीचे वाले इन्जीनियर को मुख्य अभियन्ता का प्रभार सौप रहे है तो भला वह कैसे मंत्री जी के किसी भी आदेश की अवहेलना कर सकता है...आदेश समुचित हो या अनुचित वो तो केवल मंत्री जी को एस.सर ही कह पायेगा....अन्त मे इतना जरुर कि अगर आपको मंत्री जी के बारे मे पता करना है तो इतना ही खोज लीजिये कि किस विभाग मे तीन तीन सम्भागों में कार्यपालन यंत्री मुख्य अभियन्ता के प्रभार पर हैं..
कैसा चल रहा है एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को चीफ इंजीनियर का प्रभार देने का खेल?
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