स्वराज एक्सप्रेस के द्वारा दिखाई गई खबर का असर हुआ है। हमने पहले दिखाया था कि किस तरह पीडब्ल्यूडी विभाग में टेंडर जारी करने के मामले में कागजों में हेराफेरी की जा रही है... जिसमें ठेकेदारों के साथ विभाग के इंजीनियरों का गठजोड़ कैसे काम कर रहा है... इस गठजोड़ में फील्ड में पदस्थ इंजीनियरों के साथ एसी कमरों में विराजमान मुख्य अभियंता और प्रमुख अभियंता की मिलीभगत कैसी है.. स्वराज एक्सप्रेस ने जब इस बात का खुलासा किया तो पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने प्रमुख अभियंता को तलब कर लिया... और स्वराज एक्सप्रेस के द्वारा दिखाई गई खबर पर लिखित जवाब देने को कहा है... जिस पर प्रमुख अभियंता कार्यालय द्वारा गोलमाल जवाब देने की तैयारी चल रही है..
स्वराज को मिली जानकारी के मुताबिक राणा साहब मंत्री को यह जानकारी देने वाले हैं कि गिर्राज कंपनी को जो ठेका दिया गया है उसका एल.ए. यानी लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस जारी नहीं किया गया है... लेकिन प्रमुख अभियंता महोदय इस उलझन में फंस गए हैं कि वो गिर्राज कंपनी को क्या जवाब दें.. क्योंकि उन्होंने कंपनी के डायरेक्टर प्रदीप राय को मौखिक रूप से महीने भर पहले ही जारी किए गए ठेके पर काम करने का आदेश दे चुके हैं.. जिस पर गिर्राज कंपनी ने 15 दिन पहले ही क्षेत्रीय विधायक बबलू शुक्ला से भूमि पूजन करवा कर काम शुरू कर दिया है.. यानी अभी तक 20 से 25 लाख रुपये कंपनी के द्वारा व्यय भी कर दिए गए हैं..
बहरहाल यह भी मान लेते हैं कि मामले को छुपाने के लिए राणा साहब ठेकेदार को यह हर्जाना कहीं और एडजस्ट करने की बात करके मना लेते हैं तो धूमधाम से किए गए भूमिपूजन की फोटो कैसे छुपाएंगे.. क्योंकि भूमि पूजन की फोटो सोशल मीडिया में स्वयं गिर्राज कंपनी के कर्ताधर्ताओं द्वारा डाली गई है... ऐसे में बेचारे राणा जी उलझ गए हैं.. मामला छतरपुर जिले का है जिसमें स्वराज एक्सप्रेस ने मय सबूत बताया था कि किस तरह विभाग के प्रमुख अभियंता के.पी.एस. राणा का एक विशेष कंपनी पर वरदहस्त है.. जिस पर राणा का पूरा सहयोग कर रहे हैं विभाग के कार्यपालन यंत्री आशीष भारती, जबकि वो अभी कार्यपालन यंत्री के चार्ज पर हैं यानी अभी वो एसडीओ हैं.. फिर भी कारस्तानी ऐसी जैसे वही सर्वेसर्वा हैं..
कंपनी का नाम है गिर्राज इन्फ्रास्ट्रक्चर, जिसने फर्जी कागजों के जरिए करोड़ों के टेंडर हासिल कर लिए... जिसमें गंभीर पहलू यह है कि गिर्राज कंपनी के द्वारा पेश किए गए कागजात फर्जी हैं, यह जानकारी प्रमुख अभियंता को दी गई मगर उन्होंने अनसुना कर दिया... मतलब साफ है कि उन्हें फर्जी कागजों की जानकारी पहले से थी...
दरअसल गिर्राज इन्फ्रास्ट्रक्चर को छतरपुर मेन रोड से ग्राम रजपुरा और गुलगंज मेन रोड से पाठापुरा का रोड बनाने का ठेका आवंटित किया गया.. जिसकी लागत 5 करोड़ 27 लाख आवंटित की गई.. मगर ठेका आवंटित होने के साथ ही वहां के अन्य ठेकेदारों ने गिर्राज कंपनी के द्वारा लगाए गए कागज फर्जी हैं, यह चोरी पकड़ ली.. और उसकी लिखित शिकायत 12 जनवरी को मुख्य अभियंता और 13 जनवरी को प्रमुख अभियंता को दे दी..
जिस पर गिर्राज इन्फ्रास्ट्रक्चर को ब्लैकलिस्ट होना था, मगर मजे की बात यह रही कि ठेका उसी को यानी गिर्राज कंपनी को ही दे दिया गया... हां, के.पी.एस. राणा के द्वारा चतुराई यह की गई कि गिर्राज को मौखिक रूप से रोड का काम करने का आदेश तो दे दिया, मगर एल.ए. यानी लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस के.पी.एस. राणा ने अपने पास ही रख लिया...
खैर, स्वराज एक्सप्रेस की खबर के बाद ठेकेदार और राणा दोनों पशोपेश में हैं... और शायद यह गाना गुनगुना रहे होंगे— राणा जी हमें माफ करना गलती म्हारे से हो गई।
अंत में यह जानकारी भी साझा कर रहा हूं कि के.पी.एस. राणा तो यह कहकर बच निकलेंगे कि उन्होंने कार्यपालन यंत्री आशीष भारती से सारी जानकारी मांगी थी मगर उन्होंने नहीं दी... ऐसे में आशीष भारती पर ठीकरा फूटना तय है...
उधर स्वराज एक्सप्रेस को एक जानकारी और मिली है कि के.पी.एस. राणा और गिर्राज कंपनी के कर्ताधर्ता एक ही स्कूल के प्रोडक्ट हैं... जिसका खुलासा स्वराज एक्सप्रेस जल्द ही करेगा कि किस स्कूल या कॉलेज में दोनों सहपाठी रहे हैं...
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