आज हम आपके समक्ष एक ऐसी खबर पर समीक्षा करने जा रहे हैं जिसको लेकर कुछ रिटायर्ड पुलिस कर्मी मुद्दे को तूल देना चाह रहे हैं...दरअसल पिछले चार पांच दिन से सोसल मीडिया में एक बीडियो वायरल हो रहा है जिसमें बुजुर्ग दम्पत्ति और दो तीन पुलिस वालों के बीच बहस हो रही है..बहस के दौरान साफ दिख रहा है कि उक्त बुजुर्ग पुलिस वालो से तू तड़ाक करके बहस कर रहे हैं..और साथ मे उनकी पत्नी बन्दूक लेकर खड़ी है..जिस पर पुलिस कर्मी यह कहता भी दिख रहा है आप मुझे बन्दूक मत दिखाइये या यूं कहें कि मुझे बन्दूक की धौंस मत दीजिये..अब आते है इस बात पर कि आखिर माजरा क्या था तो पन्ना छतरपुर मार्ग एन.एच 39 पर 7 अप्रैल को मड़ला थाना प्रभारी के नेतृत्व मे सघन चेकिंग अभियान चल रहा था उसी समय बुजुर्ग दम्पत्ति की गाड़ी भी वहा से निकली जिस पर चेकिंग अभियान मे लगे पुलिस कर्मियों ने उनकी गाड़ी भी रोकी और सीट बेल्ट न लगाने पर चलान करने को कहा जिस पर बुजुर्ग दम्पत्ति भड़क गये...आखिर भड़कते क्यो नही..तो दुबले पर दो असाढ वाली कहावत चरितार्थ हो रही थी..बुजुर्ग महाशय रिटायर्ड पुलिस अधिकारी थे जिसकी धौंस भी वो दे रहे है और उस क्षेत्र के नामचीन रहे भैया राजा उर्फ वीर विक्रम सिंह के बहनोई भी है ...ये वही भैय्या राजा है जिनका कभी उस इलाके में एक छत्र राज चलता था..खैर यह वीडियो जब पुलिस कप्तान निवेदिता नायडू तक पहुंचा तो उन्होने पुलिस के साथ दुर्ब्यवहार करने पर जो आम आदमी के साथ कार्यवाही होती है वही कार्यवाही उन बुजुर्ग ब्यक्ति जिनका नाम भरत सिंह चौहान है के खिलाफ भी हो गई.....बस फिर क्या था..कुछ विशेष रिटायर पुलिस अधिकारी लामबन्द हुए और यह मांग करने लगे कि चौहान के खिलाफ कार्यवाही करने वाले पुलिस अधिकारी पर ही कार्यवाही होनी चाहिये...ऐसे मे मै यह कहना चाहता हूं कि क्या कोई रिटायर्ड पुलिस अधिकारी या फिर मौजूदा पुलिस अधिकारी क्या कानून से ऊपर है..क्या कानून सिर्फ आम लोगो के लिये है..अरे चौहान साहब आप भी लम्बे समय तक वर्दी धारण करते रहे है..ऐसे मे आप जिस भाषा का प्रयोग कर रहे है तो ड्यूटी कर रहे वर्दीधारक से ऐसी भाषा का प्रयोग करना चाहिये..यदि आप उन पुलिस कर्मियो की जगह होते तो क्या करते...चौहान साहब यहां रुतवा आदमी का नहीं होता बल्कि वर्दी का होता है...और जब वर्दी धारक वर्दी मे शासकीय ड्यूटी कर रहा हो तो उसके साथ कैसा वर्ताव और कैसी भाषा का प्रयोग करना चाहिये यह आप अच्छी तरह जानते है क्योकि आप भी सब इन्सपेक्टर से लेकर डीएसपी के पद तक विराजमान रहे हैं...शायद यह बात उनको भी मालूम होगी जो रिटायर पुलिस अधिकारी आपके पक्ष मे ज्ञापन सौपते घूम रहे हैं....क्या रिटायर पुलिस कर्मियों के लिये पुलिस का ही कानून आम जनता से अलग होना चाहिये...खैर यह तो शासन प्रशासन के सोचना और समझना है..अन्त मे यही कहूंगा कि जो भी हुआ या जो हो रहा है वह अच्छा नहीं है...समाज मे जो संदेश जा रहा है वह खाकी के खिलाफ ही जा रहा है...एक बार फिर कहना चाहूंगा कानून निचले पायदान मे बैठे ब्यक्ति से लेकर ऊचे ओहदे मे विराजे माननीय तक एक है और एक होना भी चाहिये..
रिटायर्ड DCP का खाकी के प्रति ये कैसा बर्ताव
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