नई दिल्ली। भारतीय नौसेना 14 मार्च को विशाखापत्तनम में स्टेल्थ फ्रिगेट ‘आईएनएस तारागिरी’ को कमीशन करेगी। यह युद्धपोत पूर्वी नौसैनिक कमान के तहत शामिल होगा। प्रोजेक्ट 17A के तहत बना यह नीलगिरि श्रेणी का चौथा जहाज है और इसे मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने तैयार किया है। 28 नवंबर 2025 को इसे नौसेना को सौंपा गया था।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
आईएनएस तारागिरी को भारत की स्वदेशी युद्धपोत डिजाइन और निर्माण क्षमता का मजबूत उदाहरण माना जा रहा है। यह प्रोजेक्ट ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को मजबूती देता है।
इससे पहले ‘तारागिरी’ नाम की एक लीनडर श्रेणी की फ्रिगेट 1980 से 2013 तक सेवा में रही थी। नई तारागिरी उसी विरासत को आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ा रही है।
उन्नत स्टेल्थ और मारक क्षमता
प्रोजेक्ट 17A के तहत बने इन फ्रिगेट्स को वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है। ये जहाज मौजूदा और भविष्य के समुद्री खतरों से निपटने में सक्षम हैं।
आईएनएस तारागिरी में ब्रह्मोस मिसाइल, एमएफ-स्टार रडार, एमआर-एसएएम वायु रक्षा प्रणाली, 76 मिमी मुख्य तोप और क्लोज-इन वेपन सिस्टम लगाए गए हैं। पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए रॉकेट और टॉरपीडो भी शामिल हैं।
आधुनिक प्रणोदन प्रणाली
इस युद्धपोत में CODOG प्रणाली लगी है, जिसमें डीजल इंजन और गैस टर्बाइन का संयोजन है। पूरा संचालन इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम (IPMS) के जरिए नियंत्रित होता है, जिससे संचालन अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनता है।
आगे की योजना
प्रोजेक्ट 17A के तहत तीन और युद्धपोत बनाए जा रहे हैं। एक एमडीएल और दो गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) में तैयार हो रहे हैं। इन्हें अगस्त 2026 तक नौसेना को सौंपने की योजना है।
आईएनएस तारागिरी के शामिल होने से भारतीय नौसेना की समुद्री शक्ति को नई मजबूती मिलेगी और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
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