मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर और भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। मंत्री ने सदन में स्वीकार किया कि मेट्रो का वर्तमान स्वरूप और उसकी प्लानिंग स्थानीय जनप्रतिनिधियों की राय लिए बिना अधिकारियों द्वारा बंद कमरों में तैयार की गई थी, जिसे सीधे जनता पर 'थोप' दिया गया है।
विधानसभा में उठाई प्लानिंग पर उंगली
फरवरी 2026 के बजट सत्र में विभागीय अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान विजयवर्गीय ने कहा कि मेट्रो प्रोजेक्ट के शुरुआती अलाइनमेंट (रास्ते) तय करते समय जमीनी हकीकत को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अधिकारियों ने विधायकों और सांसदों से सलाह मशविरा नहीं किया, जिसके कारण आज शहर के कई प्रमुख और घने इलाके इस सुविधा से वंचित रह गए हैं या वहां अनावश्यक तोड़फोड़ की स्थिति बनी है।
प्रमुख सुधार: अब देवास और उज्जैन से जुड़ेगा इंदौर
अपनी पिछली गलतियों को सुधारने का रोडमैप पेश करते हुए मंत्री ने घोषणा की कि अब मेट्रो को केवल शहर के भीतर सीमित नहीं रखा जाएगा। सरकार का विजन अब 'सैटेलाइट टाउन कनेक्टिविटी' पर है।
इंदौर मेट्रो: अब इसे महू, पीथमपुर, देवास और उज्जैन तक विस्तारित करने की योजना पर काम शुरू होगा।
भोपाल मेट्रो: राजधानी की मेट्रो को सीहोर, विदिशा और रायसेन जैसे शहरों से जोड़ा जाएगा ताकि मुख्य शहरों का ट्रैफिक दबाव कम हो सके।
इंदौर में अंडरग्राउंड मेट्रो को मंजूरी
विवादों के बाद एक बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए सरकार ने इंदौर के हृदय स्थल (पलासिया से बड़ा गणपति) वाले हिस्से में मेट्रो को अंडरग्राउंड (जमीन के नीचे) ले जाने की मंजूरी दे दी है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि राजवाड़ा जैसी ऐतिहासिक विरासतों और घनी आबादी वाले व्यापारिक क्षेत्रों को बचाने के लिए यह निर्णय लिया गया है, भले ही इसमें लागत अधिक आए।
Comments
Leave a Reply