कोलकाता | 24 अप्रैल, 2026
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण का मतदान संपन्न होते ही राज्य की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने अपने भविष्य के राजनीतिक इरादों को स्पष्ट कर दिया है। एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने न केवल बंगाल में चौथी बार सरकार बनाने का दावा किया, बल्कि यह भी घोषणा की कि उनका अगला लक्ष्य दिल्ली से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का सफाया करना है।
"सत्ता का लालच नहीं, दिल्ली से बीजेपी को हटाना है"
ममता बनर्जी ने विरोधियों पर हमला बोलते हुए कहा कि वे व्यक्तिगत पद या कुर्सी की लालसा नहीं रखतीं। उन्होंने कहा:
"बंगाल में जीत के बाद मैं दिल्ली पर विजय प्राप्त करूँगी। मैं सभी विपक्षी दलों को एकजुट करके दिल्ली से भाजपा का सफाया करूँगी। मेरा जन्म बंगाल में हुआ है और मैं यहीं अंतिम सांस लूँगी, लेकिन भाजपा को सत्ता से बाहर करना मेरा मिशन है।"
भ्रष्टाचार के आरोपों और 'SIR' की दोहरी चुनौती
ममता बनर्जी के लिए 2026 की राह उतनी आसान नहीं है जितनी पिछली बार थी। सरकार के सामने दो प्रमुख मोर्चे हैं:
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भ्रष्टाचार का शिकंजा: टीएमसी के कई दिग्गज नेता जैसे पार्थ चटर्जी, अनुब्रत मंडल और ज्योतिप्रिय मल्लिक केंद्रीय एजेंसियों के रडार पर हैं। हालांकि इनमें से कुछ जमानत पर बाहर हैं, लेकिन 'शिक्षक भर्ती घोटाला' और 'राशन घोटाला' जैसे मुद्दे चुनाव में विपक्ष के मुख्य हथियार बने हुए हैं।
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SIR (वोटर लिस्ट पुनरीक्षण): चुनाव आयोग द्वारा किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद बंगाल की वोटर लिस्ट से करीब 91 लाख नाम (12%) कम हुए हैं। इसमें बड़ी संख्या महिला मतदाताओं और अल्पसंख्यक समुदाय की है, जो टीएमसी का मुख्य वोट बैंक माना जाता रहा है।
भवानीपुर: ममता बनाम सुवेंदु की प्रतिष्ठा की लड़ाई
ममता बनर्जी अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर से चुनाव लड़ रही हैं, जहाँ उनके सामने भाजपा के सुवेंदु अधिकारी हैं। नंदीग्राम की हार के बाद ममता के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का विषय है। गौरतलब है कि इस सीट पर भी करीब 21% मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हुए हैं, जिससे मुकाबला और भी रोचक और कठिन हो गया है।
आंकड़ों की जुबानी: बीजेपी का बढ़ता ग्राफ
तृणमूल कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चिंता भाजपा का लगातार बढ़ता वोट शेयर है। 2006 में महज 1.93% वोट पाने वाली भाजपा 2021 तक 38.14% पर पहुँच गई थी।
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