Monday, 01 June 2026
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नासिक TCS कांड: आरोपी दानिश का मोबाइल अनलॉक, 'ब्लैक मैजिक' और जबरन धर्मांतरण के खुलेंगे राज

मुंबई/नासिक | शनिवार, 25 अप्रैल 2026

महाराष्ट्र के चर्चित नासिक टीसीएस (TCS) उत्पीड़न और धर्मांतरण मामले में पुलिस को एक बड़ी तकनीकी सफलता हाथ लगी है। इस हाई-प्रोफाइल केस के मुख्य आरोपी दानिश शेख का मोबाइल फोन आखिरकार अनलॉक कर लिया गया है, जिससे इस साजिश की गहरी कड़ियों के खुलने की उम्मीद बढ़ गई है।


फेस आईडी और विशेष अनुमति से खुला मोबाइल

आरोपी दानिश शेख ने अपने मोबाइल की सुरक्षा के लिए हर एप्लिकेशन और फाइल पर अलग-अलग पासवर्ड और 'फेस आईडी' लॉक लगा रखा था। इससे फॉरेंसिक लैब (FSL) को डेटा एक्सेस करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।

  • एसआईटी की कार्रवाई: मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी (SIT) ने अदालत से विशेष अनुमति ली।

  • अनलॉक प्रक्रिया: आरोपी को स्वयं फॉरेंसिक लैब ले जाया गया, जहाँ उसकी 'फेस आईडी' का उपयोग कर मोबाइल को अनलॉक किया गया। अब पुलिस और फॉरेंसिक टीम मोबाइल से डिलीट किए गए डेटा और चैट को रिकवर करने में जुटी है।


धर्मांतरण की 'क्रोनोलॉजी' और ब्लैक मैजिक

जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने धर्मांतरण के लिए एक सुनियोजित 'क्रोनोलॉजी' अपनाई थी:

  1. भरोसा जीतना: पहले दोस्ती कर पीड़ित का विश्वास जीता गया।

  2. नशीला पदार्थ: आरोप है कि 'शीर खुरमा' में नशीला पदार्थ मिलाकर पीड़ित को खिलाया गया।

  3. मानसिक स्थिति का फायदा: पीड़ित की पारिवारिक और मानसिक समस्याओं को जानकर उसे 'ब्लैक मैजिक' (काला जादू) के जाल में फंसाया गया।

  4. दबाव: कार के जरिए अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर पीड़ित पर धर्मांतरण के लिए मानसिक दबाव बनाया गया।


चौथी पीड़िता के सनसनीखेज खुलासे

इस मामले में तब नया मोड़ आया जब चौथी पीड़िता ने महिला आयोग के सामने आकर अपनी आपबीती सुनाई। पीड़िता ने बताया कि आरोपी रजा, दानिश और तौसीफ की मदद से उसकी डिजिटल स्टॉकिंग कर रहा था और उसके बारे में कार्यस्थल पर भ्रामक अफवाहें फैलाई जा रही थीं।


हिरासत में मुख्य आरोपी

मुंबई नाका पुलिस ने नासिक रोड सेंट्रल जेल से ट्रांजिट वारंट पर चार मुख्य आरोपियों को अपनी हिरासत में लिया है:

  • तौसीफ बिलाल अत्तार (37)

  • दानिश एजाज शेख (32)

  • शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी (34)

  • रजा रफीक मेमन (35)

इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं (75, 79, 299, 302 आदि) के तहत मामला दर्ज है। पुलिस अब इन आरोपियों से आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करेगी ताकि धर्मांतरण और उत्पीड़न के इस संगठित रैकेट का पूरी तरह पर्दाफाश किया जा सके।

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