Monday, 01 June 2026
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NCB का 'ऑपरेशन रेजपिल': भारत में पहली बार पकड़ी गई 182 करोड़ की 'जिहादी ड्रग' कैप्टागन, अमित शाह ने दी बधाई

नई दिल्ली। देश को नशामुक्त बनाने के अभियान में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता हासिल की है। शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जानकारी दी कि NCB ने ‘Operation Ragepill’ के तहत भारत में पहली बार 182 करोड़ रुपये मूल्य की 'कैप्टागन' (Captagon) ड्रग्स की एक विशाल खेप जब्त की है। यह खेप मध्य पूर्व (Middle East) के देशों में भेजी जा रही थी। मामले में एक विदेशी नागरिक को भी गिरफ्तार किया गया है।

ड्रग्स के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' का बड़ा उदाहरण

गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस बड़ी कामयाबी की सराहना करते हुए लिखा:

"मिडिल ईस्ट भेजी जा रही इस ड्रग्स खेप का पकड़ा जाना और एक विदेशी नागरिक की गिरफ्तारी, भारत की ड्रग्स के खिलाफ ‘Zero Tolerance Policy’ का बड़ा उदाहरण है। मैं दोहराता हूं कि भारत में आने वाले या भारत की जमीन का इस्तेमाल कर बाहर भेजे जाने वाले हर ग्राम ड्रग्स पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। NCB के बहादुर और सतर्क अधिकारियों को बधाई।"

आखिर क्या है कैप्टागन और इसे क्यों कहते हैं “जिहादी ड्रग”?

1. दवा से बैन तक का सफर

कैप्टागन मूल रूप से एक सिंथेटिक स्टिमुलेंट (Synthetic Stimulant) ड्रग है। इसे 1960 के दशक में एडीएचडी (ADHD) और नार्कोलेप्सी (Narcolepsy) जैसी बीमारियों के इलाज के लिए विकसित किया गया था। हालांकि, अत्यधिक लत और इसके दुरुपयोग को देखते हुए 1980 के दशक तक इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह प्रतिबंधित (Ban) कर दिया गया था।

2. 'जिहादी ड्रग' का खौफनाक सच

इस ड्रग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “Jihadi Drug” कहा जाता है। खुफिया एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, पश्चिम एशिया (West Asia) के संघर्ष क्षेत्रों और 'इस्लामिक स्टेट' (ISIS) जैसे खतरनाक आतंकी संगठनों के लड़ाके इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते थे।

  • यह ड्रग लड़ाकों के दिमाग पर ऐसा असर करती है जिससे उन्हें लंबे समय तक नींद और थकान महसूस नहीं होती।

  • यह भूख को दबा देती है और इंसानी डर को पूरी तरह खत्म कर अत्यधिक आक्रामक (Aggressive) बना देती है।

3. 'गरीबों की कोकीन' और अवैध निर्माण

आज के अवैध बाजार में मिलने वाली कैप्टागन गोलियों को गुप्त लैब्स में एम्फेटामाइन, मेथमफेटामाइन और कैफीन मिलाकर तैयार किया जाता है। इसके खतरनाक मानसिक दुष्प्रभावों और कोकीन जैसे असर के कारण इसे कई जगहों पर “Poor Man’s Cocaine” भी कहा जाता है। इसके लगातार इस्तेमाल से इंसान सोचने-समझने की क्षमता खो देता है और हिंसक व्यवहार करने लगता है।

सीरिया है अवैध कारोबार का मुख्य गढ़

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुसार, सीरिया को इस सिंथेटिक ड्रग के उत्पादन का सबसे बड़ा हब माना जाता है। कैप्टागन का यह अवैध कारोबार वर्तमान में पश्चिम एशिया के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा और स्वास्थ्य संकट बन चुका है। इस धंधे से होने वाले अरबों रुपये के मुनाफे का इस्तेमाल आतंकी नेटवर्क्स की फंडिंग और हवाला कारोबार को चलाने के लिए किया जाता है। भारत में इस ड्रग की पहली जब्ती ने स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक ड्रग सिंडिकेट अब भारतीय रास्तों का इस्तेमाल करने की फिराक में हैं, जिसे NCB ने नाकाम कर दिया है।

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