Wednesday, 25 March 2026
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भोजशाला विवाद में नया मोड़: ASI रिपोर्ट में 12वीं सदी का जिक्र

लंबे समय से विवादों में रही धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने अपनी विस्तृत 2100 पेज की सर्वे रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में पेश कर दी है। रिपोर्ट की प्रतियां पक्षकारों को सौंपते हुए अदालत ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

12वीं सदी में निर्माण, 1265 में कमाल मौला का उल्लेख

एएसआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि भोजशाला का निर्माण 12वीं सदी में हुआ था, जबकि कमाल मौला के 1265 ईस्वी में यहां आने का उल्लेख है। इस आधार पर याचिकाकर्ता पक्ष ने दावा किया है कि भोजशाला का निर्माण मालवा क्षेत्र में मुगलों के आगमन से पहले ही हो चुका था।

हाईकोर्ट के आदेश पर हुआ था वैज्ञानिक सर्वे

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 11 मार्च 2024 को भोजशाला परिसर का सर्वे कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद एएसआई की विशेषज्ञ टीम ने 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया। सर्वे के दौरान कई स्थानों पर खुदाई की गई और आधुनिक तकनीकों की मदद से संरचनाओं का परीक्षण किया गया।

ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार से जांच

सर्वे में ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) तकनीक का उपयोग कर जमीन के भीतर की संरचनाओं का अध्ययन किया गया। इसके अलावा खुदाई कर दीवारों, स्तंभों, निर्माण सामग्री और शिलालेखों की विस्तृत जांच की गई। रिपोर्ट में वास्तुशिल्पीय शैली और काल निर्धारण पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई है।

मंदिर शैली के संकेत, संस्कृत-प्राकृत शिलालेख मिले

एएसआई रिपोर्ट के अनुसार भोजशाला परिसर में मंदिर शैली की वास्तुकला के संकेत मिले हैं। कई स्तंभों पर नक्काशी, कमल आकृतियां और अन्य शिल्प अवशेष पाए गए हैं। साथ ही संस्कृत और प्राकृत भाषा के शिलालेख भी दर्ज किए गए हैं, जिनकी तिथि 12वीं से 16वीं शताब्दी के बीच की मानी गई है।

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