मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्वास्थ्य विभाग की कमान को लेकर ‘एक पद, दो अधिकारी’ वाली स्थिति पैदा हो गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) की कुर्सी के लिए दो वरिष्ठ डॉक्टरों के बीच जारी खींचतान ने मंगलवार को उस समय तूल पकड़ लिया, जब डॉ. एच.एन. मांडरे कार्यभार संभालने कार्यालय पहुंचे, लेकिन उन्हें चैंबर पर ताला लटका मिला। इस प्रशासनिक रस्साकशी ने न केवल विभाग के कामकाज को प्रभावित किया है, बल्कि कर्मचारियों के बीच भी भारी असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।
ताले में बंद मिला चैंबर, कलेक्ट्रेट की बैठक में थे दूसरे अधिकारी
मंगलवार को मामला तब गरमाया जब डॉ. एच.एन. मांडरे कमिश्नर के निर्देशों का हवाला देते हुए कार्यभार ग्रहण करने CMHO कार्यालय पहुंचे। वहां पहुंचने पर उन्होंने देखा कि मुख्य चैंबर बंद है। दरअसल, उस समय पद पर आसीन डॉ. दिनेश खत्री कलेक्ट्रेट में एक महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने गए थे। एक ही पद के लिए दो अधिकारियों के आमने-सामने आने से दफ्तर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कर्मचारी यह तय नहीं कर पा रहे थे कि प्रशासनिक रूप से किसे अपना वरिष्ठ अधिकारी मानें।
तबादले और हाईकोर्ट के 'स्टे' से उलझा पूरा मामला
विवाद की जड़ें जून 2025 में हुए एक तबादले से जुड़ी हैं। उस समय डॉ. दिनेश खत्री का तबादला राजगढ़ कर दिया गया था और डॉ. एच.एन. मांडरे को रायसेन का नया CMHO नियुक्त किया गया। हालांकि, जनवरी 2026 में शासन ने पुनः डॉ. खत्री को रायसेन भेज दिया। इस आदेश के खिलाफ डॉ. मांडरे हाईकोर्ट चले गए और 'स्टे' ले आए। मार्च 2026 में कोर्ट के एक ताजा फैसले ने डॉ. खत्री के पक्ष में स्थिति मोड़ दी, जिसके बाद से वे नियमित रूप से कार्यभार संभाल रहे हैं।
कर्मचारियों में भारी असमंजस, फाइलों और हस्ताक्षरों का संकट
इस खींचतान का सबसे बुरा असर कार्यालय के निचले स्टाफ पर पड़ रहा है। कर्मचारियों के सामने संकट यह है कि वे किसके आदेशों का पालन करें और आधिकारिक फाइलों पर किसके हस्ताक्षर मान्य होंगे। इस विवाद के कारण कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य और स्वास्थ्य योजनाओं की मॉनिटरिंग प्रभावित हो रही है। स्टाफ के बीच इस बात को लेकर भी डर है कि गलत अधिकारी का आदेश मानने पर उन्हें भविष्य में अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना न करना पड़े।
शासन के हस्तक्षेप का इंतजार, अटके कई जरूरी काम
फिलहाल दोनों ही अधिकारी अपने पास कोर्ट और शासन के आदेश होने का दावा कर रहे हैं। डॉ. मांडरे जहां कमिश्नर के निर्देशों का पालन करने की बात कह रहे हैं, वहीं डॉ. खत्री कोर्ट के आदेश के आधार पर पद पर बने रहने की दलील दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों तक यह पूरा मामला पहुंच चुका है। जिले के स्वास्थ्य ढांचे को सुचारू रूप से चलाने के लिए अब शासन स्तर से किसी स्पष्ट और निर्णायक आदेश का इंतजार किया जा रहा है।
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