Monday, 01 June 2026
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राजनीति

पंजाब में सियासी घमासान: मुख्यमंत्री भगवंत मान को कोर्ट की सख्त चेतावनी, 7 सांसदों के इस्तीफे पर राष्ट्रपति से करेंगे मुलाकात

चंडीगढ़/मानसा: पंजाब की राजनीति में बुधवार को दो बड़े घटनाक्रमों ने हलचल तेज कर दी है। एक तरफ जहाँ मानसा की एक अदालत ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को मानहानि के मामले में कड़ी चेतावनी जारी की है, वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी (AAP) के 7 राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है।

1. कोर्ट की सख्त टिप्पणी: 'हाजिर हों, वरना रद्द होगी जमानत'

मानसा की स्थानीय अदालत (ACJM राजिंदर सिंह नागपाल) ने 'नज़र सिंह मानशाहिया बनाम भगवंत मान' मानहानि मामले में सुनवाई करते हुए मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है।

  • 2022 से गायब: कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया कि मुख्यमंत्री 20 अक्टूबर 2022 के बाद से एक बार भी कोर्ट में पेश नहीं हुए हैं।

  • वीसी (VC) की मांग खारिज: मुख्यमंत्री की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का अनुरोध पहले ही खारिज किया जा चुका है।

  • अंतिम चेतावनी: अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि अगली सुनवाई में मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं होते हैं, तो उनकी जमानत रद्द कर दी जाएगी। इस मामले में BNSS की धारा 273 के तहत वकील के माध्यम से पेशी की नई अर्जी पर 1 मई तक जवाब मांगा गया है।

2. दिल्ली तक पहुंची पंजाब की सियासी जंग: सांसदों का पाला बदलना

पंजाब में 'आप' को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब उसके 7 राज्यसभा सांसदों ने भाजपा का दामन थाम लिया। इस 'महा-विलय' ने न केवल संसद में समीकरण बदल दिए हैं, बल्कि पंजाब की राजनीति में भी भूचाल ला दिया है।

  • राष्ट्रपति से गुहार: मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस घटनाक्रम को 'लोकतंत्र की हत्या' करार दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि वह 5 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे।

  • दलबदल कानून का सवाल: मान का आरोप है कि चुने हुए प्रतिनिधियों को इस तरह तोड़ना जनता के भरोसे के साथ धोखा है। वह राष्ट्रपति से इस मामले में संवैधानिक हस्तक्षेप और जांच की मांग करेंगे।

  • विपक्ष का हमला: पंजाब कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने भी इसे सत्ता का दुरुपयोग और दलबदल कानून का उल्लंघन बताया है।

पंजाब की राजनीति पर प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि एक साथ इतने सांसदों का पार्टी छोड़ना भगवंत मान सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। आगामी चुनावों से ठीक पहले इस तरह की टूट पार्टी के मनोबल को प्रभावित कर सकती है। वहीं, मानसा कोर्ट का आदेश मुख्यमंत्री की कानूनी मुश्किलें बढ़ा सकता है।

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