Wednesday, 25 March 2026
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ब्राह्मण समुदाय पर कथित नफरत के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ कथित नफरती भाषणों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि वह किसी एक समुदाय नहीं, बल्कि किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत के खिलाफ है। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि समाज में नफरत फैलाने वाली भाषा किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए।

‘सिर्फ अपने समुदाय के लिए आवाज उठाना सही नहीं’

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि अक्सर लोग तभी आवाज उठाते हैं जब उनका अपना समुदाय निशाने पर होता है। यह दृष्टिकोण सही नहीं है। नफरत के खिलाफ लड़ाई सार्वभौमिक होनी चाहिए, न कि किसी एक वर्ग तक सीमित।

याचिका में क्या थी मांग

याचिकाकर्ता महालिंगम बालाजी ने कोर्ट से मांग की थी कि केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिए जाएं कि ब्राह्मणों के खिलाफ नफरती भाषणों पर तत्काल कानूनी कार्रवाई हो। साथ ही यह भी जांच कराई जाए कि कहीं कोई संगठित अभियान तो नहीं चल रहा, जिसका उद्देश्य ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ नफरत या हिंसा फैलाना है।

कोर्ट ने याचिका वापस लेने की दी अनुमति

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में विस्तृत सुनवाई करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। इसके साथ ही यह मामला फिलहाल यहीं समाप्त हो गया।

संदेश साफ: नफरत के खिलाफ एकजुटता जरूरी

इस फैसले के जरिए सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि नफरत के खिलाफ लड़ाई किसी एक समुदाय की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।

 
 
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