आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों द्वारा स्टेशन मास्टर को कथित तौर पर घसीटकर ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रेलवे सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठने लगे हैं। घटना को लेकर RPF और स्टेशन मास्टर दोनों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी भी पक्ष के दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
वायरल वीडियो ने खड़े किए कई सवाल
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में RPF के जवान स्टेशन मास्टर को पकड़कर खींचते हुए ले जाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि किसी अधिकारी से विवाद भी था, तो क्या सार्वजनिक स्थान पर इस तरह का व्यवहार उचित था?
RPF जवान ने लगाया अभद्रता का आरोप
RPF कांस्टेबल जितेंद्र कुमार का आरोप है कि स्टेशन मास्टर नरेंद्र सिंह चाहर ने ड्यूटी के दौरान उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया और उनका अपमान किया। इसी के बाद विवाद बढ़ गया।
स्टेशन मास्टर ने सुनाई दूसरी कहानी
दूसरी ओर स्टेशन मास्टर नरेंद्र सिंह चाहर का कहना है कि RPF जवान ने एक युवती को ट्रेन से जबरन उतारा, उस पर चेन पुलिंग का आरोप लगाया, उसका मोबाइल फोन अपने कब्जे में लिया और उससे कथित तौर पर 1,000 रुपये भी लिए, लेकिन कोई रसीद नहीं दी।
युवती की जान बचाने के लिए रुकवाई ट्रेन?
स्टेशन मास्टर का दावा है कि युवती चलती ट्रेन के पीछे दौड़ रही थी और उसकी जान को खतरा था। ऐसे में उन्होंने गार्ड से ट्रेन रुकवाने का आग्रह किया ताकि किसी बड़े हादसे को टाला जा सके।
क्या कानून हाथ में लेना सही तरीका है?
घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी से विवाद था, तो क्या RPF को उसे सार्वजनिक रूप से घसीटकर ले जाने जैसी कार्रवाई करनी चाहिए थी? कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों से अपेक्षा की जाती है कि वे कानून के दायरे में रहकर संयमित और गरिमापूर्ण तरीके से कार्रवाई करें।
रेलवे करेगा जांच
फिलहाल दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रेलवे प्रशासन और संबंधित अधिकारी पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि घटना की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और किसकी भूमिका कितनी जिम्मेदार थी।
अब आगे क्या?
इस मामले में जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा नियमों का उल्लंघन या अनुचित व्यवहार पाया जाता है, तो उसके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, वायरल वीडियो ने पुलिस और सुरक्षा बलों के आचरण तथा जवाबदेही को लेकर नई बहस भी छेड़ दी है।
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