Monday, 01 June 2026
Swaraj Express
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मध्य प्रदेश

कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने पर सचिव महोदया ने दिया स्वराज को नोटिस, दिखाया गया वर्दी का रौब

स्वराज एक्सप्रेस द्वारा विगत दिनों गृह विभाग की पसारा शाखा में कथित अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार संबंधी एक समाचार प्रसारित किया गया था, जिसमें विभाग की सचिव श्रीमती कृष्णावेणी देशावतु की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाये गये थे.. तथापि यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि उक्त समाचार में न तो. मैडम देशावतु पर किसी प्रकार के आर्थिक अनियमितता अथवा लेन-देन  का प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष आरोप लगाया गया था और न ही ऐसा कोई स्वराज एक्सप्रेस के द्वारा आशय व्यक्त किया गया था।प्रसारित समाचार की समग्र विषयवस्तु का अवलोकन करें तो स्वराज ने लिखा था कि जिन मोहतर्मा ने अपने शैलरी एकाउन्ट मे घूंस ली थी वो भी मैडम के स्टाफ मे ही चैन की बंसी बजा रही हैं..ऐसे मे यह  स्वतः स्पष्ट है कि रिश्वत की राशि एक महिला पुलिसकर्मी के निजी खाते में ली गई है.. जो उस समय सचिव महोदया के अधीनस्थ स्टाफ में कार्यरत थी। अतः यह निष्कर्ष निकालना कि उक्त समाचार में सचिव महोदया के द्वारा आर्थिक लेन देन किया गया है  पूर्णतः व्यक्तिपरक व्याख्या (Interpretation) है। यह न तो स्वराज एक्सप्रेस की धारणा रही है और न ही समाचार का अभिप्रेत आशय। सचिव महोदया के अधिवक्ता द्वारा यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि समाचार में कथित रिश्वत लेने वाले कर्मचारी का नाम उल्लिखित नहीं किया गया, जिससे यह भ्रम उत्पन्न हो सकता है कि रिश्वत स्वयं सचिव द्वारा प्राप्त की गई थी। इस संबंध में स्वराज एक्सप्रेस का पक्ष है कि यह निष्कर्ष अधिवक्ता महोदय अथवा सचिव महोदया की व्यक्तिगत व्याख्या हो सकती है, परंतु समाचार में ऐसा कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संकेत विद्यमान नहीं था। स्वराज एक्सप्रेस सदैव तथ्यों, दस्तावेजों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही समाचारों का प्रकाशन एवं प्रसारण करता है। जहां तक सचिव महोदया की कार्यशैली का प्रश्न है, उस पर पूर्व में भी प्रश्न उठाए गए थे और वर्तमान परिस्थितियों में पुनः उठाए जा रहे हैं। इसका कारण यह है कि आपके अधीनस्थ विभाग में कार्यरत दो कर्मचारियों के विरुद्ध लगभग डेढ़ लाख रुपये की कथित रिश्वत लेने संबंधी जांच आज भी विचाराधीन है।इस संदर्भ में कृश्णावेणी जी दिनांक 17 जुलाई 2025 को संबंधित जांच नस्ती पर स्वयं आपके हस्ताक्षर विद्यमान हैं। तत्पश्चात उसी जांच के संबंध में पुलिस महानिदेशक को पत्राचार भी किया गया। संबंधित शिकायत में शिकायतकर्ता द्वारा कथित रिश्वत प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के नामों का भी स्पष्ट उल्लेख किया गया है। इतना ही नहीं, जांच प्रक्रिया के दौरान पसारा शाखा में पदस्थ दोनों सहायक उप निरीक्षकों (एएसआई) हरेंद्र सिंह एवं प्रमेश अहिरवार को कारण बताओ सूचना-पत्र भी जारी किए गए थे। ऐसी स्थिति में यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होता है कि क्या उक्त नस्ती का सम्यक अध्ययन किए बिना ही उस पर अनुमोदन प्रदान कर दिया गया था।इसके अतिरिक्त, पुलिस मुख्यालय से संबद्ध 32 कर्मचारियों में से केवल हरेंद्र सिंह एवं प्रमेश अहिरवार को मंत्रालय में पदस्थ किए जाने हेतु पुलिस महानिदेशक (प्रशासन) को पत्र प्रेषित किया गया, जबकि शेष कर्मचारियों के संबंध में ऐसा कोई पत्राचार नहीं किया गया। यह चयनात्मक दृष्टिकोण स्वयं अनेक प्रशासनिक प्रश्नों को जन्म देता है। विशेष रूप से तब, जब इन्हीं दोनों कर्मचारियों के विरुद्ध अपूर्ण जांच के आधार पर उप सचिव (गृह) इच्छित गणपाले द्वारा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियमों के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की गई थी।स्वराज के पास वह दस्तावेज भी है जिसमें दोनों कर्मचारियों को दिनांक 7 अगस्त को अनुशासनात्मक कार्यवाही करने हेतु नोटिस जारी किए गए थे, जिनका उत्तर निर्धारित अवधि में प्रस्तुत किया जाना था। किंतु उन्होंने अपना स्पष्टीकरण तब तक नहीं दिया जब तक आपका पत्र पुलिस मुख्यालय नहीं गया... जब दिनांक 19 अगस्त को उन्हें मंत्रालय में औपचारिक पदस्थापना हेतु आपके द्वारा पुलिस महानिदेशक (प्रशासन) को पत्र प्रेषित कर दिया गया तब उसके अगले ही दिन, अर्थात 20 अगस्त को, दोनों कर्मचारियों ने डिप्टी सेकेट्री कार्यालय में अपना लिखित उत्तर प्रस्तुत कर दिया..यदि सचिव महोदया आप ही उनके द्वारा दिये गये स्पष्टीकरण को देखें तो साफ नजर आता है कि आपके पत्र का उल्लेख अपने पक्ष के समर्थन में उन्होन किस तरह से किया। ऐसी परिस्थितियों में आपकी प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।स्वराज एक्सप्रेस यह भी जानना चाहता है कि क्या मंत्रालय में किसी कर्मचारी की पदस्थापना के संबंध में सचिव स्तर से सीधे पुलिस मुख्यालय को पत्र लिखना प्रक्रिया-सम्मत था? यदि हां, तो क्या इस संबंध में अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) से पूर्वानुमोदन प्राप्त किया गया था? यदि नहीं, तो यह विषय और भी गंभीर प्रशासनिक विमर्श का कारण बनता है।आप भारतीय पुलिस सेवा की वर्ष 2007 बैच की वरिष्ठ अधिकारी हैं...अनुभवी है..ज्ञानी है..प्रसानिक क्षमतावाली है तो ऐसी स्थिति में यह अपेक्षा की जाती है कि जिस विभाग में आपको प्रतिनियुक्ति पर दायित्व सौंपा गया है, वहां शासन द्वारा निर्धारित प्रक्रियाओं एवं नियमों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए। विशेष रूप से सामान्य प्रशासन विभाग के पत्र क्रमांक एफ-6-2/2012/1/9, दिनांक 25 जून 2013 के प्रावधानों का संज्ञान लिया जाना अपेक्षित था।अंततः स्वराज एक्सप्रेस पुनः स्पष्ट करता है कि श्रीमती कृष्णावेणी देशावतु के विरुद्ध किसी प्रकार के आर्थिक लेन-देन अथवा रिश्वतखोरी का आरोप समाचार में नहीं लगाया गया था। यदि पूर्व प्रकाशित समाचार से किसी प्रकार की भ्रांति उत्पन्न हुई हो, तो उसका स्वराज एक्सप्रेस के द्वारा खंडन किया जाता है।

हालांकि यह कहना भी आवश्यक है कि जिस प्रकार एक वर्दीधारी कर्मचारी को मेरे निजी आवास पर भेजकर अधिवक्ता का नोटिस चस्पा कराया गया, वह अत्यंत आपत्तिजनक एवं निंदनीय कृत्य प्रतीत होता है। यह घटना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अनावश्यक दबाव बनाने के प्रयास के रूप में देखी जा सकती है। पत्रकारिता के क्षेत्र में चार दशकों से अधिक समय तक विभिन्न समाचार पत्रों में संपादक तथा समाचार चैनलों में चैनल प्रमुख के रूप में कार्य कर चुके व्यक्ति को खाकी वर्दी के प्रभाव से भयभीत करने का प्रयास न केवल अनुचित है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की भावना के भी प्रतिकूल है।मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस विषय की प्रतिध्वनि संबंधित उच्च स्तरों तक अवश्य पहुंचेगी तथा तथ्यों एवं विधि के आधार पर इसका समुचित मूल्यांकन किया जाएगा।

 

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