Monday, 01 June 2026
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मिडिल ईस्ट में महायुद्ध की आहट: चीन से लौटते ही एक्शन मोड में डोनाल्ड ट्रंप, ईरान पर 24 घंटे में बड़े हमले की तैयारी

वाशिंगटन/तेल अवीव। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में तनाव एक बार फिर अपने चरम पर पहुँच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन के महत्वपूर्ण दौरे से वापस लौटते ही ईरान के खिलाफ एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है। खुफिया सूत्रों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और इजराइल मिलकर अगले 24 घंटे के भीतर ईरान के खिलाफ किसी बड़ी और निर्णायक सैन्य कार्रवाई का ऐलान कर सकते हैं।

इजराइल की खुली चेतावनी: "नया संघर्ष बेहद करीब"

इजराइली मीडिया 'चैनल 12' की एक रिपोर्ट में एक वरिष्ठ इजराइली अधिकारी के हवाले से दावा किया गया है कि ईरान के साथ एक नया और भीषण संघर्ष बेहद करीब है। इसके लिए जमीनी स्तर पर तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस बार शुरू होने वाली लड़ाई कुछ दिनों की नहीं, बल्कि कई हफ्तों तक खिंच सकती है, जिसके लिए इजराइली डिफेंस फोर्सेज (IDF) को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है।

परमाणु केंद्रों पर हमले की योजना: 'न्यूयॉर्क टाइम्स' का दावा

प्रसिद्ध अमेरिकी अखबार 'न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) और इजराइली सेना मिलकर एक साझा ऑपरेशन का खाका तैयार कर चुके हैं। इस क्षेत्र में हजारों अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों की तैनाती की जा रही है। रणनीतिक विकल्पों में सबसे ऊपर ईरान के परमाणु केंद्रों (Nuclear Plants) को निशाना बनाना शामिल है। इजराइल लंबे समय से यह तर्क देता रहा है कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम उसके अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा है, और अब ट्रंप प्रशासन इस पर अंतिम मुहर लगाने की तैयारी में है।

क्या होगा अगर हमला हुआ?

यदि अमेरिका और इजराइल संयुक्त रूप से ईरान पर बमबारी करते हैं, तो पूरा मिडिल ईस्ट बारूद के ढेर पर बैठ जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार:

  • ईरान का पलटवार: ईरान के पास अत्याधुनिक और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का मजबूत जखीरा है, जिससे वह सीधे इजराइल पर हमला कर सकता है।

  • क्षेत्रीय युद्ध: लेबनान (हिजबुल्लाह), यमन (हुती विद्रोही) और सीरिया जैसे इलाकों में सक्रिय ईरान समर्थित गुट इस युद्ध में कूद पड़ेंगे, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति (सप्लाई चेन) पूरी तरह ठप हो सकती है।

ट्रंप का 'ईरान विरोधी' सख्त रुख

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हमेशा से ईरान के प्रति आक्रामक विदेश नीति के समर्थक रहे हैं। अपने पिछले कार्यकाल में भी उन्होंने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। दोबारा व्हाइट हाउस संभालने के बाद उनका मुख्य लक्ष्य ईरान को परमाणु ताकत बनने से हर कीमत पर रोकना है। इजराइल काफी समय से वाशिंगटन से इसी हरी झंडी का इंतजार कर रहा था, जो ट्रंप के 15 मई को चीन से लौटते ही सच होती दिख रही है।

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