Monday, 01 June 2026
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तमिलनाडु का सियासी रण अब सुप्रीम कोर्ट में: TVK ने दायर की याचिका, सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते सरकार बनाने का दावा

नई दिल्ली/चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य में सरकार गठन को लेकर गतिरोध गहरा गया है। अभिनेता से नेता बने थलापति विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कझगम' (TVK) के एक सदस्य ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को निर्देश देने की मांग की है कि वे विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करें। याचिका में तर्क दिया गया है कि त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में सबसे बड़े दल को मौका मिलना संवैधानिक परंपरा है।

108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है TVK, बहुमत से 5 कदम दूर

234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में इस बार किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत (118 सीटें) नहीं मिला है। चुनाव नतीजों के अनुसार:

  • TVK: 108 सीटें (सबसे बड़ी पार्टी)

  • DMK: 59 सीटें

  • AIADMK: 47 सीटें

  • कांग्रेस: 05 सीटें

  • गठबंधन की स्थिति: कांग्रेस के समर्थन के साथ विजय के पास कुल 113 विधायकों का साथ है, जो बहुमत के जादुई आंकड़े से मात्र 5 कम है।

राज्यपाल के रुख पर सवाल: "समर्थन पत्र पहले या फ्लोर टेस्ट?"

याचिकाकर्ता के. एझिलारसी (वकील और TVK सदस्य) ने राज्यपाल के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उन्होंने विजय से सरकार बनाने का न्यौता देने से पहले 118 विधायकों के समर्थन का भौतिक प्रमाण मांगा है। याचिका में कहा गया है कि जब किसी पूर्व-चुनावी गठबंधन को बहुमत न मिले, तो राज्यपाल का कर्तव्य है कि वह सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुलाएं। बहुमत का परीक्षण केवल 'सदन के पटल' (Floor Test) पर होना चाहिए, न कि राजभवन की फाइलों में।

सुप्रीम कोर्ट से 'मैंडमस रिट' की मांग

याचिका के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट से 'रिट ऑफ मैंडमस' जारी करने की अपील की गई है, ताकि:

  1. राज्यपाल को थलापति विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने का निर्देश दिया जा सके।

  2. राज्यपाल को तब तक किसी अन्य दल के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने से रोका जाए जब तक TVK को मौका न मिल जाए।

संवैधानिक परंपरा का हवाला

याचिका में दलील दी गई है कि राज्यपाल द्वारा समर्थन पत्र मांगना संवैधानिक प्रक्रिया को उलटने जैसा है। सही प्रक्रिया यह है कि सबसे बड़े दल को शपथ दिलाई जाए और फिर उन्हें सदन में बहुमत साबित करने के लिए एक निश्चित समय दिया जाए।

तमिलनाडु की जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें अब सुप्रीम कोर्ट के रुख पर टिकी हैं, क्योंकि कोर्ट का यह फैसला न केवल तमिलनाडु, बल्कि देश में भविष्य में होने वाली 'त्रिशंकु विधानसभा' की स्थितियों के लिए एक नजीर साबित होगा।

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