अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए इस्लामाबाद में चल रही उच्च स्तरीय शांति वार्ता बुधवार को गंभीर गतिरोध में फंस गई। पाकिस्तान की मध्यस्थता में लागू 14 दिनों का युद्धविराम फिलहाल बरकरार है, लेकिन दोनों देशों के बीच प्रमुख मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है। खासतौर पर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को तुरंत खोलने की अमेरिकी मांग और ईरान पर लगे प्रतिबंधों को लेकर बातचीत अटक गई है।
वार्ता में बढ़ता डेडलॉक
शांति वार्ता के दौरान अमेरिका ने समुद्री मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को तत्काल खोलने की सख्त शर्त रखी है, जिसे ईरान ने खारिज कर दिया। ईरान का कहना है कि जब तक उस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों में ढील नहीं दी जाती, तब तक वह किसी भी प्रकार की रियायत देने को तैयार नहीं है। इस मुद्दे पर दोनों देशों के रुख में कड़ा टकराव देखने को मिल रहा है।
परमाणु कार्यक्रम बना सबसे बड़ा विवाद
वार्ता में सबसे बड़ी बाधा ईरान का परमाणु कार्यक्रम बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन को तत्काल प्रभाव से पूरी तरह बंद करे, जबकि ईरान इसे अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानता है। तेहरान का कहना है कि पहले अमेरिका को प्रतिबंध हटाने होंगे और क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां कम करनी होंगी, तभी किसी समझौते की दिशा में बात आगे बढ़ सकती है।
ट्रम्प की सख्त चेतावनी
बातचीत में प्रगति न होने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान को चेतावनी दी है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि यदि अगले 48 घंटों में समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों को और सख्त कर देगा। इसके साथ ही अमेरिकी नौसेना ने अरब सागर में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
वैश्विक बाजारों पर असर
इस कूटनीतिक गतिरोध का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में करीब 5 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। वहीं भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में आ गए। अनिश्चितता के माहौल में निवेशकों का झुकाव सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ा है, जिसके चलते सोने की कीमतें 1,53,000 रुपये के पार पहुंच गई हैं।
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