चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में दशकों पुराना द्रविड़ वर्चस्व (DMK और AIADMK) हिलता नजर आ रहा है। चुनाव नतीजों में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है, जिससे राज्य में 'हंग असेंबली' (त्रिशंकु विधानसभा) की स्थिति पैदा हो गई है।
1. 108 बनाम 150: क्या है बधुरुदीन के दावे का सच?
मदुरै सेंट्रल सीट से DMK के दिग्गज नेता पीटीआर पलानीवेल त्यागराजन को हराने वाले माधर बधुरुदीन ने दावा किया है कि TVK के पास 130 से 150 विधायकों का समर्थन है।
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आधिकारिक आंकड़े: TVK ने 108 सीटें जीती हैं।
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गणित: बहुमत के लिए 118 सीटें चाहिए। बधुरुदीन का संकेत है कि DMK गठबंधन (73 सीटें) और अन्य दलों के कई विधायक विजय के संपर्क में हैं। उन्होंने इसे 'मैजिक' करार दिया है जो राज्यपाल के बुलावे के बाद दुनिया देखेगी।
2. चेन्नई में 'किलेबंदी' और रिसॉर्ट पॉलिटिक्स
विजय ने अपने सभी 108 नवनिर्वाचित विधायकों को चेन्नई के पास महाबलीपुरम (मामल्लपुरम) के एक निजी रिसॉर्ट में रुकने का निर्देश दिया है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण माने जा रहे हैं:
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टूट-फूट का डर: DMK और AIADMK जैसी अनुभवी पार्टियों द्वारा विधायकों को लुभाने (Poaching) की कोशिशों से बचाना।
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एकजुटता का संदेश: राज्यपाल के सामने शक्ति प्रदर्शन के लिए सभी विधायकों का एक साथ होना जरूरी है।
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रणनीतिक बैठक: विजय खुद विधायकों के साथ सरकार गठन और 'विधायक दल के नेता' के चुनाव पर चर्चा कर रहे हैं।
3. सरकार बनाने के संभावित समीकरण
TVK को बहुमत के लिए 10 और विधायकों की जरूरत है। राजनीतिक गलियारों में दो संभावनाएं चर्चा में हैं:
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DMK गठबंधन में सेंध: कांग्रेस (5), वामपंथी दल (4) और VCK (2) जैसे छोटे दल अगर पाला बदलते हैं, तो विजय आसानी से 118 का आंकड़ा पार कर लेंगे।
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बाहरी समर्थन: क्या DMK खुद को 'किंगमेकर' की भूमिका में रखकर विजय को बाहर से समर्थन देगी ताकि AIADMK को सत्ता से दूर रखा जा सके?
4. क्या कहते हैं जानकार?
विशेषज्ञों का मानना है कि विजय की पार्टी 'भ्रष्टाचार और विभाजनकारी राजनीति' के खिलाफ चुनाव लड़ी है। ऐसे में DMK या AIADMK के साथ खुला गठबंधन उनके 'क्लीन इमेज' वाले एजेंडे को नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन सत्ता के शिखर तक पहुँचने के लिए उन्हें 'जोड़-तोड़' की राजनीति का सहारा लेना ही पड़ेगा।
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