Wednesday, 22 July 2026
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बच्चे के हाथ का जिम्मेदार कौन? सरकारी डॉक्टर पर गंभीर आरोप, जनसुनवाई में फूट-फूटकर रो पड़ा पिता

रिपोर्ट: गौरव शर्मा

गुना। मध्य प्रदेश के गुना जिले की जनसुनवाई में मंगलवार को एक ऐसा मामला सामने आया जिसने मौजूद अधिकारियों और लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। अपने मासूम बच्चे को गोद में लेकर पहुंचे राजेश अहिरवार अधिकारियों के सामने भावुक हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी डॉक्टर के कथित लापरवाहीपूर्ण इलाज के कारण उनके बच्चे का हाथ गंभीर रूप से प्रभावित हो गया। पीड़ित का दावा है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

जनसुनवाई में न्याय की गुहार

राजेश अहिरवार ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि वह लंबे समय से स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला।

सरकारी डॉक्टर पर निजी क्लीनिक में इलाज का आरोप

शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित डॉक्टर सरकारी अस्पताल में पदस्थ हैं, लेकिन उन्होंने बच्चे का इलाज अपने निजी क्लीनिक में किया। राजेश का दावा है कि वहां उनसे 150 रुपये परामर्श शुल्क लिया गया और करीब 1,200 रुपये की दवाइयां भी लिखी गईं।

इंजेक्शन के बाद बिगड़ गई हाथ की हालत

पीड़ित पिता का आरोप है कि बिना आवश्यक जांच किए बच्चे को इंजेक्शन लगाया गया, जिसके बाद उसके हाथ की स्थिति लगातार खराब होती चली गई। उनका कहना है कि आज बच्चे के हाथ की हालत बेहद गंभीर है और परिवार मानसिक व आर्थिक परेशानी से गुजर रहा है।

कई शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का दावा

राजेश अहिरवार का कहना है कि उन्होंने पूरे मामले की शिकायत कई बार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से की। इसके अलावा जनसुनवाई में भी कई आवेदन दिए, लेकिन अब तक किसी प्रकार की प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

वीडियो होने का भी दावा

शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को एक वीडियो भी उपलब्ध कराया है, जिसमें डॉक्टर कथित रूप से बच्चे के इलाज का उल्लेख करते दिखाई देते हैं। हालांकि इस वीडियो की प्रामाणिकता और उसके संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल

इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि शिकायतकर्ता के अनुसार कई बार आवेदन दिए गए, तो अब तक जांच कहां तक पहुंची? क्या विभागीय जांच शुरू हुई है? यदि हुई है तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है? और यदि नहीं हुई, तो आखिर क्यों?

जांच के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट

फिलहाल शिकायतकर्ता ने सरकारी डॉक्टर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित डॉक्टर या स्वास्थ्य विभाग का पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। पूरे मामले की सच्चाई आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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