MP News:मध्यप्रदेश में इन दिनों सरकार में बैठे नुमाइंदों के बीच सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा। इसकी चर्चा अब सत्ता के गलियारों से निकलकर बाहर भी होने लगी है। कारण है भाजपा के दिग्गज कहे जाने वाले नेताओं के बीच वर्चस्व का संघर्ष। कुछ ऐसी ही चर्चा हो रही है दो दिन पहले रायसेन में हुए चार जिलों के किसान मेले की, जिसका आयोजन तो केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया, पर राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी की उपस्थिति के कारण राजनीतिक हलकों में शक्ति प्रदर्शन की चर्चा होने लगी। खुसुर-पुसुर इस बात की हो रही है कि जब से नितिन नवीन राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं, तब से शिवराज सिंह चौहान की मध्यप्रदेश में कुछ ज्यादा ही सक्रियता दिखने लगी है, जिसका असर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी दिख रहा है। खैर, यह तो रही राजनीतिक चर्चा, अब बात करते हैं प्रशासनिक कारस्तानी की। तो बता दें कि आयोजन को सफल बनाने के लिए केंद्र से आए दो सीनियर आईएएस अधिकारियों ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कानूनी अधिकारों की सीमा भी तोड़ दी। एक अधिकारी तो हफ्ते भर से भी ज्यादा समय तक रायसेन में ही डेरा डाले रहे, जिसका परिणाम यह रहा कि आयोजन स्थल दशहरा मैदान की रूपरेखा ही बदल गई। जो दशहरा मैदान सपाट और समतल था, अब वह खेत का रूप ले चुका है, क्योंकि किसानों को दिखाने के लिए उसे बनावटी खेत का रूप देना था। जो उन्होंने दे भी दिया, लेकिन अब दशहरा मैदान को वापस उसी रूप में लाने के लिए क्या खर्च आएगा और कौन करेगा, यह सवाल आज भी बना है और शायद आगे भी बना रहेगा। उधर दूसरे साहब प्रिंसिपल सेक्रेटरी रैंक के हैं, जो आए तो थे किसान सम्मेलन को सफल बनाने, मगर तफरी करने में ज्यादा मशगूल रहे। हां, बीच-बीच में सक्रियता दिखाने के लिए साहब जिले के अधिकारियों की तल्ख लहजे में जरूर क्लास ले लेते थे। इसी क्रम में हद तब कर दी, जब उन्होंने एक महिला आईएएस अधिकारी को सार्वजनिक तौर पर इस तरह डांट लगाई कि वे बेचारी डिप्रेशन में चली गईं। यही नहीं, बड़े साहब ने उस महिला आईएएस अधिकारी की जीपीएस लोकेशन तक मांग ली, जिसका मतलब साफ था कि उक्त महिला कब-कब, कहां-कहां गई। अब जरा आप ही सोचिए कि किसी भी महिला से उसके मोबाइल की जीपीएस लोकेशन मांगने का क्या अर्थ होता है। खैर, ये महिला आईएएस प्रमोटी हैं और साहब सीधे भर्ती सेवा के हैं, इसलिए शायद वो बड़े साहब को जवाब देने में संकोच कर गईं। अगर यही महिला अधिकारी आर.आर. सेवा की होती, तो नजारा कुछ और ही होता, निश्चित ही बड़े साहब की साहबगीरी उतर जाती। अब बात आती है नियम-कायदे की, तो कोई भी केंद्र में पदस्थ अधिकारी राज्य के किसी भी अधिकारी से सीधे तौर पर जवाब-तलब कर ही नहीं सकता। अगर उसे राज्य में पदस्थ किसी अधिकारी से जवाब-तलब करना है, तो वह प्रदेश के मुख्य सचिव को सूचित करेगा, उसके बाद मुख्य सचिव के निर्देश पर विभाग का वरिष्ठ अधिकारी स्पष्टीकरण मांगेगा। बहरहाल, यह मुद्दा महिला अधिकारी के सम्मान में आगे तूल पकड़ता है या नहीं, यह तो बाद की बात है, लेकिन जिस दिन प्रशासन में जीपीएस लोकेशन देने का नियम हो जाएगा, तो न जाने कितने अधिकारी गृह कलह की चपेट में आ जाएंगे। अंत में जाते-जाते यह जरूर बता दें कि वो महिला आईएएस अधिकारी एक बोर्ड में पदस्थ हैं और 2021-22 बैच की आईएएस अधिकारी हैं।
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