PHE के चीफ इंजीनियर की शिकायत मंत्रालय पहुंची। शिकायतकर्ता ने कहा चीफ इंजीनियर झूठे SC / ST एक्ट में फंसाने की दे रहे धमकी।
मध्य प्रदेश
उज्जैन से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी विभागों में कामकाज की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीएचई विभाग के मैकेनिकल परिक्षेत्र में पदस्थ एक सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी ने अपने ही वरिष्ठ अधिकारी पर मानसिक उत्पीड़न और दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता ने यह आरोप प्रमुख सचिव को लिखित पत्र के माध्यम से भेजा है।
निजी कार्य के लिए दबाव का आरोप
शिकायतकर्ता विशाल सपकाले का आरोप है कि प्रभारी मुख्य अभियंता एल.एन. मालवीय उन्हें बार-बार उज्जैन स्थित निवास पर बुलाकर अनुचित कार्य करने का दबाव बनाते थे। कर्मचारी का कहना है कि आदेश न मानने पर उसे निलंबित करने की धमकी दी गई, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान हो गया और नौकरी छोड़ने तक की स्थिति में पहुंच गया।
लोकायुक्त जांच का भी उल्लेख
शिकायत पत्र में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित अधिकारी की खरीदी से जुड़े मामलों की जांच पहले से लोकायुक्त में लंबित है। साथ ही आरोप है कि शासकीय कार्य के लिए अनुबंधित वाहन का निजी उपयोग किया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने जांच के लिए भोपाल-उज्जैन मार्ग के टोल नाकों के रिकॉर्ड खंगालने की मांग की है।
एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी का आरोप
पत्र में एक और गंभीर आरोप लगाया गया है कि वरिष्ठ अधिकारी ने कर्मचारी को एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी दी। यदि यह आरोप सही पाया जाता है तो मामला और अधिक गंभीर हो सकता है।
तीन महीने बाद भी कार्रवाई नहीं
बताया जा रहा है कि शिकायत भेजे तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक प्रमुख सचिव स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और शिकायत निवारण तंत्र पर भी सवाल उठ रहे हैं।
निजी कार्य के लिए दबाव का आरोप
शिकायतकर्ता विशाल सपकाले का आरोप है कि प्रभारी मुख्य अभियंता एल.एन. मालवीय उन्हें बार-बार उज्जैन स्थित निवास पर बुलाकर अनुचित कार्य करने का दबाव बनाते थे। कर्मचारी का कहना है कि आदेश न मानने पर उसे निलंबित करने की धमकी दी गई, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान हो गया और नौकरी छोड़ने तक की स्थिति में पहुंच गया।
लोकायुक्त जांच का भी उल्लेख
शिकायत पत्र में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित अधिकारी की खरीदी से जुड़े मामलों की जांच पहले से लोकायुक्त में लंबित है। साथ ही आरोप है कि शासकीय कार्य के लिए अनुबंधित वाहन का निजी उपयोग किया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने जांच के लिए भोपाल-उज्जैन मार्ग के टोल नाकों के रिकॉर्ड खंगालने की मांग की है।
एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी का आरोप
पत्र में एक और गंभीर आरोप लगाया गया है कि वरिष्ठ अधिकारी ने कर्मचारी को एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी दी। यदि यह आरोप सही पाया जाता है तो मामला और अधिक गंभीर हो सकता है।
तीन महीने बाद भी कार्रवाई नहीं
बताया जा रहा है कि शिकायत भेजे तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक प्रमुख सचिव स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और शिकायत निवारण तंत्र पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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